वो मेरी चुदाइ करने ही आया था


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हेलो दोस्तों मैं आपकी सहेली शालिनी आपके लिए फिर से आ गई हूं मुझे देखकर याद आया कि मैं गोरी जयपुर वाली भाभी जिसने अपने जीजू का लंड  ले लिया था. याद तो आ ही गया होगा क्यों? मेरी जैसी भाभी को आखिर भूल भी कौन सकता है?

वैसे दोस्तों आपके मुझे सुझाव मिले जो मेरी पिछली कहानियों में थे, यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई जो कि बहुत ही ज्यादा अच्छे थे.

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दोस्तों में आपके लिए अपनी अगली कहानी लेकर आई हु जो मेरे दोस्तों के लंड और मेरी सहेलियों की चूत का पानी निकाल देगी.

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आप तो जानते हो कि मैं शादीशुदा हूं, पर जब से मैंने अपनी चीजू का लंड देखा है तब से मेरा प्यार अब ना सिर्फ अपने पति के लिए रहा बल्कि अपने जीजू के लिए भी है, मेरी पिछली कहानियों में मेरे जीजू ने मेरी चीखें निकाल दी थी, और मेरी गांड का भी भरता बना दिया था, पर अब की बार मुझे ना चाहते हुए भी दूसरा लंड लेना पड़ गया.

अब तो मुझे सोते जागते सिर्फ अपने जीजू की ही याद आती थी. और उनके लंड  की ही तड़प महसूस हुआ करती थी. पर यह सिर्फ मुझे ही नहीं जीजू के साथ भी होता था. जीजू का जब मन करता वह मेरी चूत को और अपने लंड को शांत करने के लिए मुझे चोद डालते और कभी कभी ना मिलने पर वह मुझे फोन कर के मेरा और अपना पानी निकाल और निकलवा देते, और अब तो मैं घर पर भी बोर होने लगी थी इसलिए मैं भी अब प्राइवेट स्कूल में टीचर की पोस्ट पर लग गई.

यह बात तब की है जब मेरे पति टूर पर रहते थे और मेरे प्यारे जीजू को भी मुझे चोदने के लिए टाइम नहीं मिलता था, और अब तो वह ४ महीने से घर भी नहीं आए थे और पिछले २ महीने से तो उनका फोन आना भी बंद हो गया था.

मुझे जीजू के लंड की याद तो बहुत आती थी पर मैं और कुछ कर भी नहीं सकती थी, और घर पर अकेले रहते हुए मेरे दिमाग में तो बस इसी तरह ही रहता था मैं दिनभर सेक्स स्टोरी पढती और रात में टीवी  में ब्लू फिल्म लगा कर खुद ही अपनी उंगलियों से और मूली से चोद डालती थी.

एक दिन की बात है मैं स्कूल पढाने के लिए जा रही थी मुझे सुबह से अपनी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी, पर मैं फिर भी हिम्मत करके स्कूल चली गई. क्योंकि घर पर किसी के ना होने की वजह से मैं भी घर पर बोर हो जाती.

अब जब मैं स्कूल पहुंची तो एक लेक्चर के बाद मेरी तबीयत और बिगड़ गई और मुझे चक्कर भी आने लग गए. तब मैंने प्रिंसिपल से छुट्टी ली और मुझे चक्कर आने की वजह से एक लड़का मुझे घर तक छोड़ने आ गया, और उसने मुझे मेडिसिन भी लेकर दे दी.वैसे मैं उसका नाम बता दूं, उसका नाम अजय है और मेरे अगले ३ दिन स्कूल ना जाने की वजह से अजय मेरे घर मेरा हालचाल पूछने और मेडिसिन देने आ गया.

अब आप सोच रहे होंगे कि अजय कौन हे? इसका जवाब में आप को देती हूं, अजय मेरे स्कूल का एक स्टूडेंट हे जो के एकदम हट्टा-कट्टा और नौजवान है, उसके छह पैक भी बने हुए हैं, जिस पर लड़कियां तो क्या स्कूल की टीचर भी फिदा है. अजय पढ़ाई में बहुत अच्छा है और अपने इस जवानी के चलते उसने एक टीचर जिसका नाम सुमन है और वह भी मेरे स्कूल में ही पढ़ाती है उसे चोद रखा है.

बातों बातों में सुमन ने अपनी अजय के साथ की चुदाई को मेरे आगे खुली किताब की तरह रख दिया, मुझे यह पता चल गया था की अजय का लंड एकदम मोटा और लंबा लंड था, वह देख कर किसी की चूत मचल जाए, जो कि यही हाल मेरा भी हो रहा था, मेरी चूत में भी यह सब सुन अपना पानी छोड़ दिया था और उतावली हो रही थी.

मुझे भी अब अपनी चूत चुदवाके काफी समय हो गया था, इसलिए मेरा मन भी अजय का लंड लेने के लिए उतावला होने लग गया था, पर शर्म भी आती थी. कि मैं यह सब कैसे कहूं? इसलिए मैंने उसकी पहल होने का इंतजार किया.

फिर जब मुझे बुखार चढ़ गया और 3 दिन घर पर पड़ी बोर होने लगी, तब अजय मुझे देखने मेरे घर आया और मुझे मेडिसिन देते हुए मेरे पास बैठ गया. मैं तो उसके इस मस्त जिस्म को निहारते हुए अपनी आंखें सेकने लगी और उसकी पहल होने का इंतजार करने लगी, क्योंकि मैं तो बस अब उसके लंड से चुदना चाहती थी.

में यह सोच ही रही थी कि इतने में अजय ने मेरे सर पर हाथ रख कर बुखार देखा और फिर कलाइ पकड़ कर भी देखने लग गया, मुझे उसके छूने से एक अजीब सी कंपन महसूस हुई, जिसको उसने भी पहचान लिया. और वह मेरे हाथ को पकड़कर ही बातें करने लग गया और यह सब से मैं बहुत खुश हुई.

उस दिन फ्राइडे था और बातों बातों में सुमन की बात निकल गयी और उसकी बात करते हुए अजय बोला सुमन तो मेरे पीछे पड़ गई, वरना तो मैं किसी और को चाहता हूं.

मैं उसकी बात सुनकर चहक उठी और बोली कौन है वह?

अजय – है कोई.

मैं – अरे बताओ तो.

अजय ने सस्पेंस खोलते हुए कहा वह शादीशुदा है इसलिए डर लगता है.

जब अजय के मुह से शादी शुदा की बात सुनी तो मैं एकदम से चहक उठी क्योंकि मुझे लगा कि यह कहीं मेरी बात तो नहीं कर रहा.

मैंने उसे जबरदस्ती कर पूछना चाहा तो उसने मुझे टाल दिया, और कहा कल बताऊंगा. अब मैं भी ज्यादा कुछ नहीं कह पाई, क्योंकि मैं पहले पहल नहीं करना चाहती थी. इसलिए चुप हो कर बैठी रही. और अजय भी मेरे पास बैठ कर बातें करने लगा. और फिर उसको भूख लग रही थी, जोकि साफ पता चल रहा था इसलिए मैंने दो पिज्जा ऑर्डर किया और होम डिलीवरी पर चढ़ा दिया, थोड़ी देर बाद पिज्जा आ गया और मैं और अजय पिज्जा खाने लगे.

मैं तो बीमार थी इसलिए अजय ने मुझे ज्यादा खाने नहीं दिया और मेरे वाला भी खुद खा गया, यह देखकर मैं खुश थी और अब उसे भी ज्यादा लेट हो रहा था इसलिए वह अब अपने घर के लिए यहां से चला गया.

अब उसके जाने के बाद में तो बस उसकी इसी बात के बारे में सोचने लगी कि आखिर कौन है वह लड़की?

मेरे मन में बहुत से सवालों ने उछल कूद मचा रखी थी इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि कब रात हो गई और रात को भी यही सब सवाल दिमाग में चलते रहे, जिसकी वजह से मुझे नींद भी नहीं आई. और इसी के चलते सुबह हो गई और अब तो मेरे इंतजार की घड़ियां भी खत्म होने को थी.

आज मैं कल से कुछ ज्यादा अच्छी थी इसलिए मैंने घर की साफ सफाई भी कर दी और अब दोपहर होने का इंतजार करने लगी, क्योंकि अजय स्कूल की छुट्टी के बाद भी मेरे घर आता था अब थोड़ा इंतजार करने के बाद मेरा वह इंतजार भी खत्म होने को था, इसलिए अब मैं जान कर बेड पर जाकर लेट गई. और जब अजय ने दरवाजा नोक कीया तो मैंने उसे आवाज देकर ही अंदर आने को कहा.

अजय अंदर आया तो मैं उसे देख मुस्कुराई और उसे पानी का ग्लास पकड़ाया और उसे अपने पास बैठने को कहा, अजय ने पानी पी कर ग्लास साइड में रख दिया और मेरे पास आकर मेरे माथे को फिर से छुआ और मेरी कलाई हाथ में पकड़ कर मुझे देखने लगा, मैं बहुत खुश हुई और उसके छूने से मेरे अंदर एक बिजली की लहर दौड़ पड़ी.

वह मेरे पास आकर बैठ गया और बातें करने लगा, तभी मैंने उसे कल वाली बात पर पूछा कि आखिर कौन है वह शादी शुदा?

पहले तो उसने नखरे दिखाने चाहे पर जब मेरी नाराजगी उसे दीखी तो जो उसने बोला वह सुन कर तो मेरा दिल उछल कर जैसे बाहर ही आ गया.

अजय – शालू तुम तो बहुत नादान हो.

मैं – क्या?

अजय – आई लव यू शालू.

उसकी यह बात सुनकर बहुत खुश हूई लेकिन दिखावा करते हुए मैंने उसे थोड़ा अलग तरीके से कहा – क्या कहा तुमने?

यह सुन कर अजयने बिना मेरा कोई जवाब दीए मेरे होठों को अपने होठों में भर लीया और मुझे कुछ ना तो बोलने का मौका दिया और ना ही खुद कुछ बोला, पर मैं तो चाहती ही थी कि मैं भी अजय की बाहों में आऊ.

आज वह दिन था जब मैं अजय की बाहों में थी और उसके जिस्म से मेरा जिस्म छूने से मुझे खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, और फिर अचानक से भी मेरे हाथ अजय के सर पर उसके बाल सहलाने लगे और जिससे उसे को पता चल गया कि मैं तो  अब उसके बस में हूं, इसीलिए अब उसका हाथ भी मेरे शरीर पर फीरने लगा, जिससे मैं तो मचल उठी. और फिर कुछ पल बाद मैंने महसूस किया की अजय का हाथ तो मेरे बूबू पर है और वह मेरे बूब ऊपर से ही मसल रहा है.

बूब्स अजय के हाथों में आकर एकदम से खड़े हो गए थे और जीसे अजय दबाने लगा और उसके दबाने से मुझे भी बहुत मजा आने लगा, मैं मदहोश होती चली गई और मेरी आंखें भी मानो बंद हो गई. इसलिए अब अजय की बाहों का मैं पूरे वजह से मजा उठा रही थी. और अजय भी मेरे ब्लाउज को खोलने की कोशिश में लगा हुआ था, उसने एक दो हुक खोल दी और मैंने उसे तभी पीछे की और धक्का दे दिया.

मैं – अजय, यह सब गलत है और..

अब उसने मेरी बात काटते हुए मुझे जबरदस्ती अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होठों को अपने होठों में लेते हुए उसे चूसने लगा. मैं अब उसके मजे लेने लगी और फिर अजय का हाथ मेरे ब्लाउज के अंदर से मेरे बूब पर चला गया और बूब्स को दबाने लग गया.

बूब्स के दबाने से मैं लंबी लंबी सिसकियां लेने लगी और दूसरी तरफ मेरी चूत भी अपना पानी छोड़ रही थी, तभी मुझे महसूस हुआ कि उसके हाथों ने मेरे शरीर पर चलना शुरू कर दिया है, और मेरा ब्लाउज और ब्रा मेरी जिस्म से अलग कर दिए हैं.

अब मेरे ३६ साइज़ के बूब उसके सामने बिल्कुल नंगे थे, जिसे देख अजय ने बिना कोई देरी करते हुए मुंह में भर लीया और मेरा दूध पीने लग गया, और जिससे मेरे बदन की गर्मी बढ़ने लगी.

अब मेरी जिस्म की गर्मी तो बढ़ती जा रही थी इसलिए मैंने भी अपना सुपाडा, अपना माल खोजना शुरू कर दिया और हाथ पहुंचते ही मैंने उसे अपने हाथ में भर लिया. करीब ८ इंच लंबा लंड मेरे हाथों में आते ही मेरे शरीर की गर्मी और बढ़ गयी थी और मैं उसके लंड को हाथों में लेकर मसलने लगी और सोचने लगी कि आज तो मुझे फिर से चुदाई का असली मजा आने वाला है.

अब अजय और मैं उठे और अपने कपड़े उतार कर एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए, मेरा नंगा जिस्म देखकर अजय ऑलरेडी मुझ पर गिर गया और मेरे चिकने गोरे बदन को चूसने और चाटने लग गया.

मैं भी अजय के लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी और अब अजय मेरी जांघों के बीच में चला गया और कुछ पल बाद मुझे अपनी चूत पर उसकी जीभ का एहसास हुआ, जिसे मेरी चूत की गर्मी फिर से बाहर आ गई, और एक जोर की पिचकारी निकल गई, जिसे अजय ने अपनी जीभ से चाट लिया.

अब अजय उठ कर मेरे पास आया और मेरे मुंह की तरफ अपना लंड करके बैठ गया तो में समझ गई की और अजय मुझसे क्या चाहता है? अजय ने बड़े प्यार से अपना लंड मेरे गुलाबी होंठों पर रख दिया मैंने अब देर ना करते हुए अपना मुंह खोला और उसका लंड अपने मुंह में ले लिया.

मैं अजय के लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी मानो में एक छोटी सी बच्ची हूं और लॉलीपॉप को चूस चूस कर खा रही हूं, और अजय का लंड मेरे मुंह में पूरा फिट आ रहा था, वह धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे कर के मेरे मुंह को भी चोद रहा था.

करीब मैंने १५ मिनट तक उस का लंड तसल्ली से चूसा और फिर उसका लंड अपने मुंह से निकाल दिया, अभी तक मेरी चूत मस्ती में पानी पानी हो चुकी थी, उसे अब लंड की जरूरत थी मेरी चूत को अजय का लंड चाहिए था.

जैसे ही मैंने उसका लंड अपने मुंह से निकाला वह समझ चुका था कि मुझे अब क्या चाहिए? अजय ने देर ना करते हुए उठकर मेरी टांगों की तरफ आ गया उसने मेरी दोनों टांगें आसमान में उठा दी और अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया और धीरे धीरे मेरी चूत में डालने लगा, मेरी चूत पहले से ही चूत के पानी से गीली थी इसलिए उसका लंड बड़े आराम से मेरी चूत की गहराईयों में उतरता चला गया.

लंड पूरा अंदर तक जाते ही अजय को पता नहीं क्या हुआ?  वह बहुत ज्यादा जोर से मेरी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा, मेरी चूत में उसका लंड मेरी बच्चेदानी में लग रहा था जिसकी वजह से मुझे दर्द हो रहा था, और मेरी चीखें निकल रही थी, पूरा कमरा मेरी चीखो और चूत की फच फच की आवाज से गूंज रहा था.

मैं पूरी मुस्त हो कर चुदाई करवा रही थी और मुस्ती में मेरे मुंह से ना जाने क्या क्या निकल रहा था, आह्ह औऊ ई अह्ह्ह अजय शाबास, ऐसे ही मुझे जोर जोर से चोदो. आज फाड़ दो मेरी चूत को.. इस को फाड़ कर इसके चार टुकड़े कर दो अपने डंडे से… अहहह औऊ अह्ह्ह अऊ ओया ह्ह्श यस्स यस अह्ह्ह्ह और जोर लगा कर चोदो मुझे.

मैं पूरे जोश में थी और अपनी गांड उठा उठाकर अजय से अपनी चूत की चुदाई करवा रही थी, वैसे अजय की भी तारीफ करनी पड़ेगी. क्योंकि अजय अब तक लगातार एक स्पीड में मेरी चूत को चोद रहा था, मेरी चूत का तो बुरा हाल हो चुका था, वह लगातार पानी छोड़ रही थी और मेरी चूत का पानी बाहर निकल कर मेरी गांड से होता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था.

ऐसे ही कुछ देर मुझे चोदने के बाद अजय ने मुझे उसकी कुतीया बनने को कहा अब तो मैं सेक्स किया आग में जल रही थी, इसलिए मैंने बिना कुछ बोले उसके सामने उसकी कुत्तिया बन गई और अपनी गांड खोल कर उस के सामने रख दी. अजय ने फिर से अपने लंड मेरी चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड  मेरी चूत में उतार दिया. अजय मेरी चूत पीछे से मार रहा था इसलिए मुझे कुछ ज्यादा ही दर्द हुआ, क्योंकि उसका लंड इस बार मेरी चूत में अच्छे रगड़ खा रहा था.

अब अजय ने अपना एक हाथ मेरे बूब पर रखा और उसे जोर जोर से मसलने लगा और दूसरा हाथ मेरी कमर पर रख कर मेरी चूत को जोर जोर से चोदने लगा, उसका लंड पूरा गरम हो रहा था, मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो मेरी चूत में एक गर्म लोहे की रॉड जोर जोर से अंदर बाहर हो रही थी, अभी तक मेरी चूत अपना पानी दो बार निकाल चुकी थी.

अजय इस पोजीशन में करीब २० मिनट तक चोदता रहा और उसके बाद अचानक उसने अपनी स्पीड ४ गुना कर दी और दो मिनट बाद ही उसका पूरा जिस्म एकदम अकड़ गया, और उसका लंड अपना सारा मेरी चूत में निकाल दिया, उसके पानी से मेरी चूत पूरी भर चुकी थी, अब अजय थक कर मेरे ऊपर ऐसे ही लेट गया, अजय का इस अंदाज में मेरे ऊपर लेटना मुझे सच में बहुत अच्छा लगा.

करीब १५ मिनट बाद अजय मेरे ऊपर से उठा और जैसे ही उठा उसका लंड एकदम मेरी चूत में से निकल गया और मेरी चूत में पानी निकलने लगा, तभी अजय ने पास पड़े मेरा पेटिकोट उठाया और उसी से मेरी चूत और अपना लंड अच्छे से साफ कर दिया.

उसके बाद अजय ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ मेरी गुलाबी होंठों पर रखकर मेरे होठों को चूसने लगा. अब मैं सोच रही थी कुछ देर पहले मुझे बुखार की वजह से इतनी थकावट महसूस हो रही थी और अजय की इस जबरदस्त चुदाई के बाद मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था.

अब मेरा मन फिर से चुदने का होने लग गया मेरा मन अभी तक इस चुदाई से नहीं भरा था, मेरी चूत अजय का लंड एक बार और अंदर लेना चाहती थी, इसलिए मेरे हाथ अपने आप उसके लंड पर चले गए और धीरे-धीरे उसके लंड को सहलाने लगी. मैं चाहती थी कि अब जल्दी से खड़ा हो जाए और मैं फिर से एक और अच्छी सी चुदाई करवा लू.

करीब ५ मिनट में अजय का लंड खड़ा होने लगा, मैंने झट से उसे अपने मुंह में डाल दिया ताकि उसका लंड जल्दी से खड़ा हो जाए और हुआ भी ऐसे ही ५ मिनट तक अजय का लंड चूसने के बाद उसका लंड फिर से पहले जैसा हो गया, अब मैंने उसका लंड अपने मुंह से बाहर निकाला और खुद उसके लंड पर अपनी चूत सेट कर के उसके ऊपर बैठ गई.

अजय का लंड एकदम मेरी चूत में उतरता चला गया और मेरी चूत के एंड तक जा पहुंचा और मैंने उसके लंड के ऊपर अपनी गांड उठा उठा कर कूदने लगी. अजय नीचे से झटके मार मार कर मेरी गांड को जवाब देने लगा.

दोस्तों इतनी मस्त चुदाई चल रही थी ना कि मैं आपको नहीं बता सकती, करीब १० मिनट की इस मस्त चुदाई के बाद एक बार फिर से मेरी चूत ने अपना सारा पानी अजय के लंड पर निकाल दिया और मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेट गई.

अब मेरा पानी निकल गया था और मैं पूरी तरह थक चुकी थी, पर अब भी अजय का लंड मुझे चोदने के लिए बेताब था. और मुझे तो यह तक पता नहीं था कि में उसके साथ कीतनी बार अपना पानी निकाल चुकी थी, पर अब मेरी चूत ने फिर से लंड खाया और करीब ३० मिनट बाद उसने अपना सारा पानी निकाल दिया, जिससे मेरी हालत और बुरी हो गई. पर अभी भी अजय का लंड शांत नहीं हुआ था पता नहीं कितने समय से प्यासा था, इसलिए उसने मुझे फिर से चोद डाला

अब मैं लगातार दो बार चुकी चुकी थी इसलिए हम बिस्तर पर सो गए और मेरे अंदर तो अब आंख खोलने की हिम्मत तक नहीं बची थी, फिर थोड़ी देर बाद जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अजय अपनी आंखें बंद किए बड़ी प्यारी सी स्माइल बनाकर सो रहा था, अब मैं उठ गयी और कॉफी बना कर ले आई और उसे बड़े प्यार से उठाकर अपने हाथों से कॉफी पीलाई, और जब उसने जाने को कहा तो मेरा मुंह सा बन गया और मैंने उसे रात यही रुकने को कहा.

यह सुनकर अजय एकदम से खुश हुआ शायद वह पहले से यही चाहता था कि वह मेरे पास ही रहे. अब उस के रहने के बाद तो मै सारी रात, कल का सारा दिन फिर अगली सारी रात खूब चूदी जिससे चुदने से मेरी चूत का तो आज भरता ही बन गया.

मैं उस स्कूल में करीब ८ महीने और रही और उस समय मुझे अजय ने खूब चोदा और मेरी चूत को खूब मजे भी दिए.

अब जब भी मुझे चुदवाने का मन करता है तो मेरी चूत अजय को बहुत याद करती है.

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