मेरी विधवा बुआ ने देवर का लंड लिया


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बुआ की उम्र ही क्या हुई थी जब वो विधवा हुई थी, 32 या फिर मेक्सिमम 35? ताऊ जी को पॉवर शोक लगा और वो ओन ध स्पॉट ही मर गए. पापा को अपनी बहन से बहुत प्यार था इसलिए वो बुआ को हमारे घर पर ले आये. और उन्होंने ही बुआ का पालन पोषण पूरी लाइफ करने का दादा जी को वचन भी दे दिया.

सब कुछ सही चल रहा था. बुआ हमें यानि की मुझे और मेरी बहन को पढ़ाती थी और मम्मी को घर के काम में पूरा दिन हाथ बटाती थी. बदले में उसे ये सर छिपाने की जगह और खाना मिल रहा था. पापा उन्हें त्यौहार पर पैसे वगेरह भी देते थे. और मम्मी भी बहुत प्यार से ही रखती थी उन्हें. बुआ जी का एक देवर था जिसका नाम संतोष अग्रवाल है. वो अक्सर अपनी भाभी यानी मेरी बुआ को मिलने के लिए घर पर आता था.

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दोनों बुआ के कमरे में घंटो बातें करते थे. मैं तब काफी छोटा था इसलिए कुछ उतना पता नहीं चलता था. लेकिन एक दिन जब मुझे बुखार आया था तो पापा ने डोक्टर अंकल को बुलाया. अंकल ने दवाई दी और मुझे ठन्डे पानी की पट्टी रखने के लिए कहा मस्तिक पर.

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पहले दो घंटे बुआ ही पट्टी रखती रही. फिर पापा ऑफिस से जल्दी घर आ गए. और वो और मम्मी मेरे पास बैठे हुए थे. बुखार की वजह से मैंने आँखे बंद की हुई थी. और तब मम्मी को लगा की मैं सो गया हूँ.

मम्मी: जी सुनते हो, अब रागिनी को आप कुछ कह ही दो, संतोष आये दिनों यहाँ आता रहता हैं. आप घर में नहीं होते है तो मुझे एकदम अजीब लगता हैं.

पापा: मैंने बापू जी से बात की लेकिन वो रागिनी को देवर से ब्याहने में राजी नहीं है. वो कहते हैं तेरे से नहीं पलती तो मेरे घर छोड़ जा लेकिन अब मैं अपनी विधवा बेटी की दूसरी शादी नहीं करूँगा.

मम्मी: तो क्या हम अपने घर में हमारी आँखों के सामने ये सब होता रहने देंगे, आप को पाप से डर नहीं लगता होगा लेकिन मैं इस पाप के बोज से दब रही हूँ.

पापा: तुम बस कुछ दिन और देखो, मैं खुद रागिनी से बात करता हूँ. और बापू जी को भी समझाने की ट्राय करता हूँ.

मैं बुखार से पीड़ित था लेकिन मैं समझ गया की संतोष और मेरी विधवा बुआ का चक्कर था और वो उसे चोदने के लिए ही हमारे घर पर आता था. और वो घंटो कमरे में बंद भी सेक्स करने के लिए ही होते था. मैंने मन ही मन सोच लिया की मैं भी उन दोनों का शो देखूंगा जरुर.

बस उसी दिन से मैं घात लगाए सा बैठा था की कब देखने को मिले उन दोनों का काण्ड मेरे को. फिर एक दो दिन ही बीते थे की एक दिन संतोष आ गया. बुआ चहक उठी उसे देख के जैसा की हमेशा होता रहा था. और मेरी माँ ने शकल बनाई ओ आज मैंने पहली बार देखा.

हॉल में पानी चाय पिला के फिर वो दोनों ऊपर वाले बेडरूम में चले गए. मैंने अपने छिपने की जगह पहले से ही देख ली थी. और वो जगह से मुझे दोनों का मेटनी शो भी साफ़ दिखने वाला था.

संतोष ने कमरे में घुसते ही बुआ को पकड लिया. और वो दोनों लव बर्ड्स के जैसे एक दुसरे की चौंच में चौंच को लगा के चूमने लगे. बुआ की सफ़ेद साडी में उसकी ब्लाउज दिख रही थी. संतोष अपने हाथ को मम्मो पर ले गया और उन्हें दबाने लगा. बुआ कराह उठी.

उसने अपने देवर के लौड़े को पकड़ा और बोली अब की तो बहुत दिनों के बाद आये तुम.

संतोष ने बुआ की चोटी को खोल दिया और उसके बाल बिखर गए. वो बोला अभी पिछले हफ्ते तो आप को मजा दे के गया था भाभी जी. और आज फिर से आप की गरम हो गई.

संतोष के लौड़े को मर्दन करते हुए बुआ बोली मेरी तो तेरा लेने के लिए एकदम रेडी ही रहती है हमेशा ही.

चलो फिर अपना काम चालू कर दो भाभी, संतोष ने हँसते हुए कहा

बुआ अपने घुटनों के ऊपर जा बैठी और संतोष के लंड को बहार निकाल के उसके सुपाडे को किस करने लगी. और फिर उसके अंडे को जकड़ लिया उसने. संतोष कराह सा उठा. बुआ ने लौड़े को अब मुहं में ले लिया और उसे जोर जोर से चूसने लगी. बुआ के बूब्स के ऊपर हाथ ले जाना उतना आसान नहीं था पर फिर भी संतोष ने उसके लिए ट्राय की. जब हाथ नहीं गया तो वो बुआ के खुले हुए बालों को प्यार से सहलाने लगा.

बुआ के मुहं से चससस्स्स्स च्स्स्स की आवाजे निकल रही थी. और वो कस कस के लौड़े को हिला भी रही थी चूसने के साथ साथ.

फिर बुआ ने लंड को अपने मुहं से निकाल के कहा अब मेरी भी तो चाटो.

और फिर वो दोनों ने 69 पोजीशन बना ली. बुआ एकदम रंडी के जैसे ही लग रही थी उस वक्त. बड़े मजे से वो अपने देवर के लंड को हिला हिला के चूस रही थी. और उसके देवर ने भी चूत के दाने को अपनी जबान से जो हिलाया की बुआ के अन्दर की औरत पूरी बहार आ गई. वो चीखने लगी, चाट और जोर जोर से साले क्या मजा आ रहा हैं तेरे चूत को चाटने से.

मुझे पक्का यकीन था की अगर मुझे आवाज आ रही थी तो माँ भी ये सब जरुर सुन ही रही थी.. और शायद यही वजह से वो बुआ से चिढती थी. बुआ किसी सडकछाप रंडी के जैसे लंड को चूस चूस के अपनी चटवा रही थी.

पांच मिनिट तक दोनों का ओरल सेक्स चला. और फिर बुआ ने कहा चल भीगा हुआ लंड मेरे बूब्स में घुसा दे.

इतना कह के उसने अपने दोनों बूब्स को साथ में मिला दिया. उसका देवर उसकी छाती के ऊपर आ गया अपने लंड को ले के. और उसने लंड को बूब्स के बिच में घुसा दिया. बूब्स के आरपार हुआ लंड तो उसके सुपाडे को बुआ ने मुहं में ले लिया. वो बूब्स फकिंग के मजे ले रही थी.

और फिर संतोष ने कहा अब डाल देता हूँ चलो टाँगे खोलो.

बुआ ने मिशनरी पोज बना ली. उसके देवर ने लंड घुसा दिया चूत में और दोनों एक दुसरे को आलिंगन में भर के चुदाई के असीम सागर में खो से गए. पांच मिनिट में मेरा लंड भी पेंट में पानी छोड़ चूका था बुआ को चुदते हुए देख के. और फिर वो दोनों ने कुतिया वाले पोज़ में भी सेक्स किया.

संतोष ने संतोष वाली चुदाई की और फिर वो कपडे पहन के बुआ के साथ निचे चला गया!!!

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