विधवा आंटी को जमीन पर चटाई बिछाकर चोदा

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विधवा आंटी को जमीन पर चटाई बिछाकर चोदा,, सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।
मेरा नाम सावन कुमार है। पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ और यही पर अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मैं 5’ 8” की कदकाठी वाली मर्द हूँ और मेरा लंड भी 6” लम्बा है और काफी मोटा है। इस वजह से मैं जिस लड़की के साथ मौज मस्ती (यानि की चुदाई) करता हूँ उसे भी काफी मजा मिलता है। मेरे शरीर में काफी उर्जा है जिस वजह से मैं हर लड़की को सम्भोग करके चरम सुख दे देता हूँ और मेरे पास पडोस की लड़कियाँ सिर्फ मेरे बारे में ही बाते करती रहती है। सब मुझे तरह तरह से पटाने में लगी रहती है। पर दोस्तों कभी कभी किसी उम्र दराज और अधेड़ उम्र वाली आंटी के साथ चुदाई करने में भी काफी मजा मिलता है।
इसलिए अगर कोई आंटी पडोस में पट जाती है तो उसे पेल देता हूँ और जब तक वो “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की आवाजे न निकाल दे तब तब उसका गेम बजाता हूँ। कुछ ऐसा ही सुखद हादसा हुआ मेरे साथ अभी कुछ दिन पहले। मेरे पडोस में कुछ घर छोड़ कर एक विधवा आंटी रहती है जो बहुत भरे हुए बदन की है। उनका नाम लीना है। वो विधवा थी और 2 बच्चे थे उनके। मैं उनको लीना आंटी बोलकर पुकारता हूँ। पहले तो रोज उनके घर में मैं शाम को हाल चाल और दुआ सलाम करने जाता था, पर कुछ दिनों से मेरे एग्जाम्स चल रहे थे इसलिए 2 महीना लीना आंटी से मुलाकात नही हो सकी। जब मेरे एक्जाम्स खत्म हो गये तो मैं शाम को सड़क से गुजर रहा था। लीना आंटी मैक्सी पहनकर अपने घर के बाहर बैठकर मटर छील रही थी। मुझे देखा तो मुस्कुराने लगी।

“अरे सावन बेटा!! तुम तो मुझे भूल ही गये!!” लीना आंटी बोली
“नही आंटी ऐसा नही है!!” मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया
“आओ बैठो बेटा!” वो बोली और कुर्सी डाल दी
मैं बैठ गया। मैक्सी में क्या सेक्सी माल दिख रही थी। बाल खुले हुए हवा में उड़ रहे थे और कितने सेक्सी दिख रहे थे। मैं आंटी को ताड़ने लगा और वो मुझे ताड़ने लगी। फिर उन्होंने मुझे आँख मारी।
“कभी कभी मेरा हाल चाल भी ले लिया करो!!” वो इशारे से बोली
इससे पहले उनके दोनों बूब्स दबा चूका था। ये बात कुछ महीने पहले की है। उस दिन उनकी चुदाई कर देता पर जाने कहाँ से उनके बच्चे आ गये और मुझे लीना आंटी से दूर हटना पड़ा। वो वाली हमारी चुदाई अभी भी बाकी थी।
“जरुर आंटी!! मेरा पेपर चल रहा था। आप तो जानती हो की पढना भी जरूरी है। उसके बिना तो काम नही चलेगा” मैंने कहा
फिर आंटी मुझे घूर घूरकर देखने लगी। मेरी नजर उनकी गुलाबी सेक्सी मैक्सी पर दूध पर गयी। 36” की कसी कसी चूचियां जो देखी तो लंड खड़ा होने लगा। सोचने लगा की आज इनकी अधूरी ख्वाहिश और प्यास बुझा दूँ। आंटी का रंग काफी साफ़ था और काफी खूबसूरत जवान उम्र की थी। अभी 30 साल उम्र थी उनकी।
“करेगा???” बोल??” टाइम है तेरे पास??” उन्होंने मुझसे इशारे से पूछा
“क्या???” मैंने कहा
“वही जो अधुरा काम तू उस दिन छोड़कर गया था” लीना आंटी बोली और मुझे फिर से आँख मारी
“चलो!!” मैंने धीरे से कहा
आंटी ने अपनी हरी मटर वाली थाली उठाई और दुसरे हाथ से प्लास्टिक की कुर्सी उठाई और अंदर चली गयी। मैंने भी अपनी कुर्सी उठाई और घर में चला गया। दरवाजा बंद किया। सीधा हम दोनों बेडरूम में घुस गये। दोस्तों उस वक़्त सुबह के 11 बजे थे। आंटी के बच्चे स्कूल गये हुए थे। इसलिए आज कोई नही आने वाला था। आज उनकी चुदाई मैं पूरा करने वाला था। बेडरूम में अंदर जाते ही आंटी ने मुझे पकड़ लिया और हम किस करने लगे। उन्होंने बालो में बेले के फूल वाला गजरा लगाया हुआ था जिसकी खुसबू बड़ी अच्छी थी। मैंने भी आंटी को मैक्सी में ही दबोच लिया और खुद से चिपका लिया। फिर जल्दी जल्दी हम दोनों किस करने लगे। ओंठ से ओंठ लगाकर चुम्मा चाटी शुरू हो गयी।
“i love you सावन बेटा!!” वो जोश में आकर कहने लगी
“मैं भी तुमने बहुत प्यार करता हूँ आंटी!!” मैं बोला

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उसके बाद खड़े खड़े हम चुम्बन में डूब गये। विधवा आंटी की सांसे बड़ी सुगन्धित थी। मैं तो पूरा मजा ले रहा था। मैंने कसकर उनको अपने सीने में दबाये रखा था। उनके गले में हाथ डालकर उनके गुलाबी होठो को चूस रहा था। आंटी ने किसी तरह का मेकअप नही किया था। कानो में सोने के झुमके पहने थी और मांग सूनी थी क्यूंकि अब वो विधवा हो चुकी थी। बिना बिंदी के थोड़ी अजीब दिख रही थी पर फिर भी काफी खूबसूरत औरत थी। उसके बाद आग दोनों तरफ से जल गयी और वो भी उतनी ही चुदासी हो गयी जितना की मैं था। कामातुर होकर बड़ी जोश खरोश में आकर मेरे गाल, गले और चेहरे पर बड़ी जल्दी जल्दी चुम्बन देने लगी। मैंने भी ठीक ऐसा ही किया। हम दोनों एक दूसरे को खा जाने के मूड में थे। मैं भी उनको कसके अपनी बाजुओ में जड़क लिया और उनके पुरे चेहरे पर चुम्मा ही चुम्मा जड़ दिए।
उनकी मैक्सी काफी लम्बी थी और पैरो तक लटक रही थी। मैंने हाथ से पकड़कर उनकी मैक्सी उठा दी और अपना हाथ उनकी चूत पर लगाने लगा। उन्होंने चड्डी पहन रखी थी और जैसा मैं सोच रहा था की वो नंगी होंगी वैसा नही था। मैंने सीधा उनकी चड्डी पर चूत के उपर हाथ लगाना शुरू कर दिया और लीना आंटी “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। मैं चूत को उँगलियों से सहलाने लगा और खड़े खड़े ही आंटी को गर्म करने लगा। धीरे धीरे उनको एक दीवाल के किनारे ले जाकर खड़ा कर दिया और 5 मिनट चूत उपर से सहलाई और उनको गर्म करता रहा। फिर वो मेरे सीने से ऐसे चिपक गयी जैसे मेरी प्रेमिका हो।
“ओह्ह सावन बेटा!! तू कितना सेक्सी है रे!! …..ऊऊऊ मुझे आज अच्छे से गर्म करके चोदना। कोई जल्दबाजी मत करना। आज कोई हमे डिस्टर्ब नही करेगा” लीना आंटी बोली
मैंने बिना कुछ बोले ही सिर हिलाया। फिर दीवाल से सटाकर उनको खड़ा किया और फिर से उनके गुलाबी रसीले संतरे जैसे सेक्सी होठो का चुम्बन लेने लगा। 7- 8 मिनट तक चूसता रहा। फिर ऊँगली के इशारे से मैक्सी उतारने को कहा। लीना आंटी ने अपनी मैक्सी को उतार दिया और अब पर्पल ब्रा और पेंटी में वो मेरे सामने खड़ी थी। सिर से पाँव तक मैं बड़ी धीरे धीरे उनके ताजमहल जैसे जिस्म को देख रहा था और निहार रहा था। फिर मैंने भी अपना शर्ट पेंट उतार दिया और सिर्फ अंडरवियर में हो गया। फिर लीना आंटी से जाकर चिपक गया। हम दोनों अब अर्धनग्न थे और दोनों ही कामुक और चुदासे हो गये थे। उसके बाद आंटी मुझे हर जगह किस करने लगी। मुझसे किसी गर्लफ्रेंड की तरह चिपक गयी और प्यार करने लगी।
मेरी नंगी पीठ पर आंटी के दोनों हाथ बेपरवाह इधर उधर घूम रहे थे। मेरे सीने पर उन्होंने हाथ लगा लगाकर चुम्बन करना शुरू किया। ठीक ऐसा ही मैंने किया। उनको बांहों में भरकर प्यार करने लगा। उनके पेट, कमर पर मेरे हाथ इधर उधर नाच रहे थे। उनके जिस्म की भीनी भीनी खुसबू नाक से सूंघकर आनन्दित होने लगा। वो भी मुझे अपने बॉयफ्रेंड की तरह प्यार करने लगी। आंटी मेरे सीने पर हाथ घुमा घुमाकर अपना प्यार प्रदर्शित कर रही थी। दोनों आज दो जिस्म एक जान बनने के मूड में दिख रहे थे।
“आंटी!! ब्रा खोलो!!” मैंने अगला आदेश दिया

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उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए अपने हाथ पीछे किया और ब्रा उतार दी। उनके सम्पूर्ण रूप से नग्न दूध मेरे ठीक सामने थे। आह कितने सुंदर!! कितने गोल!! और कितने रसीले!! आम जैसे मीठे दिख रहे थे। मैं आंटी पर कूद पड़ा और दोनों 36” के दूधो को हाथ में ले लिया जैसे खुदा ने इनको सिर्फ मेरे लिए ही बनाया हो। “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..आराम से सावन बेटा!!” आंटी कहने लगी
मैं मंत्रमुग्ध होकर उनके दूध हाथ से दबाने लगा। क्या मस्त मस्त स्तन से मित्रो। मैं झुक गया और लीना आंटी को दीवाल से चिपकाकर उनके स्तन का अमृतपान करने लगा। चूचियों को लेकर मुंह में भरके चूसने लगा और फिर तो जन्नत में पहुच गया था। आंटी जी सी सी अई अई हा हा.. करने लगी। मेरे सर के बालो में अपने हाथ घुमाने लगी। मैं तो चूसता ही चला गया। कितना मजा, कितना आनन्द, कितना सुख मुझे मिल रहा था। उनकी दाई चूची का जब मैंने सारा रस चूस लिया तो बायीं चूची को पकड़कर मुंह में ले लिया और फिर से मुंह चला चलाकर चूसने लगा। हम दोनों की intimacy बहुत बढ़ गयी और घनीभूत हो गयी। मैंने 10 मिनट किसी चोदू मर्द की तरह लीना आंटी की बायीं चूची को चूस चूसकर उनका बुरा हाल कर दिया।
“……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा ….. दर्द हो रहा है बेटा!! आराम से चूसो!!” आंटी जी बोली
पर मैं अपनी धुन में लगा रहा और बुरा हाल कर दिया। फिर मैं नीचे बैठ गया और आंटी के पेट पर प्यार से हाथ घुमाने लगा। वो ठीक मेरे सामने खड़ी थी और फिर से ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। दोस्तों वो 2 बच्चे की माँ जरुर थी पर पेट काफी सुडौल और पतला था। अक्सर आप लोगो ने देखा होगा की 30 साल के उम्र की औरतो का पेट निकल आता है। वैसा बिलकुल नही था और काफी पतला और सपाट पेट था। मैं हाथ लगा कर उसपर प्यार करने लगा, फिर होठो से किस करने लगा। उनकी नाभि काफी सुंदर, सेक्सी थी। इसलिए मैं उसमे जीभ घुसाकर चूस रहा था। ऐसा करने से लीना आंटी काफी चुदासी हो गयी। फिर मैंने ही उनकी पर्पल कलर की पेंटी नीचे उतारी और उनके दाये पैर को उठाकर निकाल दी।
अब लीना आंटी मेरे सामने पूरी तरह से नग्न अवस्था में थी। उसकी भरी हुई चूत का मुझे दीदार होने लगा। ओह्ह!! कितनी खूबसूरत चूत थी दोस्तों।
“जरा पैर खोलिए” मैंने कहा
लीना आंटी ने दीवाल के सहारे खड़े खड़े ही अपने पैर खोल दिए। मैं उनकी चूत को ऊँगली से फैलाया और जल्दी जल्दी अपनी जीभ घुसाकर चाटने लगा। “ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… चाटो और चाटो सावन बेटा!! ओ हो हो….” वो कहने लगी। मैंने भी उनकी ख्वाहिश पूरी कर दी और गुलाबी कुप्पा जैसी चूत को मजे लेकर चूसने लगा। जब जब मेरी जीभ उनकी बुर से टकराती तो लीना आंटी बहुत आनन्दित होने लग जाती। मैंने 10 -11 मिनट चूत को अच्छे से चाटा और चूसा। फिर उनकी सफ़ेद चिकनी जांघो को हाथ से टच करने लगा और अनेक बार किस किया।
“आंटी जी घोड़ी बनो!!” मैंने कहा

लीना आंटी कमरे के फर्श पर बिछी चटाई पर ही घोड़ी बन गयी। अपने घुटनों को मोड़कर दोनों हाथो पर झुक गयी। मैं किसी कुत्ते की तरह उनके पीछे था और झुककर उनकी चूत जल्दी जल्दी पीछे से चाटने लगा। फिर अपना मोटा 6” लंड मैंने धीरे धीरे उनकी भोसड़ी में घुसा दिया और चुदाई शुरू कर दी।
“……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…..और कसके चोदो सावन बेटा!! और तेज!!” वो कहने लगी
मैं किसी कुत्ते की तरह पीछे से उनकी चूत बजाने लगा। मुझे काफी सेक्सी फिलिंग आ रही थी। जल्दी जल्दी पीछे से सम्भोगरत हो गया और हम दोनों एक साथ वासना के सुंदर में डूबने उतराने लगे। मुझे भी पीछे से काफी कसावट मिल रही थी। जल्दी जल्दी गेम बजाये जा रहा था। आंटी के चूतड़ कितने गुलाबी और लाल लाल खूबसूरत दिख रहे थे। उनके चूतड़ फूले फूले किसी गेंद के जैसे दिख रहे थे। मैं हाथ से उनको कसके दबा देता था और चुदाई करता जा रहा था। आंटी आराम से घोड़ी बनी रही और सम्भोग करवाती रही। बार बार “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की चींखे निकाल रही थी। उनकी आहे मेरा जोश और बढ़ा रही थी। मैं अपने मोटे लंड को अंदर तक उनकी चूत में घुसाकर बच्चेदानी तक उनकी गहरी और गहन चुदाई कर रहा था। लीना आंटी का बुरा हाल था। फिर कुछ देर बाद मैंने अपना पानी उनके चूत में ही छोड़ दिया। फिर हम दोनों जमीन पर चटाई पर ही लेट गये और एक दूसरे को बाहों में भरके प्यार करने लगे। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज bukovsky2008.ru पर पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

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