ट्रेन के संडास में अजनबी लोडा चूसा – गे स्टोरी

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मैं सोलापुर की बिजनेश ट्रिप पर जा रहा था और बंगलौर से सोलापुर एक्सप्रेस में बैठा हुआ था. मेरे सामने की सिट में एक तगड़ा बन्दा बैठा हुआ था. वो देखने में फिट और सेक्सी था.

उसके साथ एक मिनिट की बात में पता चला की वो एक बिहारी मजदुर था. वो भी सोलापुर ही जा रहा था. ट्रेन स्पीड में थी और मैंने अपने काम में इयरफोन लगा दिए और सोंग सुनने लगा.

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और मेरी निगाहें उसकी छाती के बाल के ऊपर लगी हुई थी. वो बाल घुंघराले से थे और छाती की चमड़ी से वो चिपके से हुए थे. और उन्हें देख के मेरे मन में तो लड्डू फुट रहे थे.

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जब वो मेरी तरफ देखता था तो मैं अपनी नजर को उसकी छाती से दूर ले जाता था. उसने मुझे जांघ पर हाथ लगा के कहा, आप को ऐतराज़ ना हो तो मैं अपने पाँव को आप की सिट पर लम्बा कर लूँ? आप भी मेरी सिट पर अपने पाँव लम्बे कर लीजिये. मैंने स्माइल के साथ उसे हाँ कहा और उसने अपने लेग मेरी सिट पर रख दिए.

फिर वो अपने फोन पर किसी से बात करने लगा. और वो बात करते हुए खूब हंस भी रहा था.

मैं समझ गया की या तो वो अपनी बीवी या गर्लफ्रेंड के साथ में बात कर रहा था. जब मर्द अपनी पार्टनर के साथ बात करता है तो उसके चहरे पर एक अलग ही ख़ुशी होती है जो अभी उसके चहरे के ऊपर थी. जब तक वो फोन पर था मैं भी सोंग्स सुन के अपने आप को बीजी रखे हुए था.

फिर अचानक से उसका लेग मेरे लेग को टच हुआ. और वो फोन पर बात करते हुए ही उसको सहला सा रहा था. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुझे देख के जैसे रोमांस का इशारा कर रहा था. जैसे उसने किसी औरत का लेग टच कर रखा हो वैसे उसके चहरे पर भाव थे. मैंने सोचा की हो सकता हैं की गलती से उसका लेग टच हो गया हो. इसलिए मैंने लेग को थोडा दूर कर दिया. लेकिन वो फिर से मेरे लेग को अपने लेग को टच करवाने लगा और वो देख भी ऐसा रहा था की जैसे वो एकदम एक्साइट हो.

मैं ऊपर से निचे तक हिल गया. हालांकि मैं कुछ देर पहले उसके छाती के बाल को देख रहा था लेकिन मैंने ये नहीं सोचा था की ट्रेन में भी ऐसा कुछ हो सकता था. अँधेरा हो गया था क्यूंकि अब बोगी में ऑलमोस्ट हर कोई सोया हुआ था. हम दोनों की लोअर बर्थ थी और हमारे कम्पार्टमेंट में हम दोनों के अलावा एक कपल था जो कब से अपर बर्थ पर सोया हुआ था.

अब उसकी हिम्मत एकदम से बढ़ चुकी थी. उसने मेरे एक पाँव को ले के अपने लंड के एकदम पास में ही रख दिया. और वो अपने लंड को मेरे पाँव से घिस सा रहा था. मुझे भी इंटरेस्ट आ रहा था इसलिए मैंने भी उसे ये सब करने ही दिया.

फिर वो उठा और धीरे से मुझे बोला, मुझे पता हैं की तुम्हे मेरी बॉडी पसंद आई हैं, बाथरूम में चलो मैं तुम्हे मेरा लंड दिखाता हूँ.

मैंने हंस के उसकी बात से मना कर दिया.

एक मिनिट के बाद वो वापस आया टॉयलेट वाली साइड पर जा के. जब वो वापस आया तो उसने अपनी शर्ट के दो बटन खोले हुए थे और उसकी हेरी छाती एकदम सेक्सी लग रही थी. मैं वहां से अपनी आँख को हटा ही ना सका!

मैंने एक पल भी नहीं सोचा और उठ के उसके साथ टॉयलेट में चला गया. मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं ट्रेन के संडास में एक मर्द के साथ जाऊँगा!

जैसे ही हम संडास में घुसे उसने मेरे निपल्स को अपने हाथ से पिंच किये और दुसरे हाथ से वो मेरे लिप्स को टच कर रहा था. मुझे ये सब बहुत ही अच्छा लग रहा था.

उसका कॉल फिर से आया. वो एकदम धीरे से और रोमांटिक ढंग से बात करने लगा फोन के ऊपर.

फिर उसने मुझे कंधे से पकड के निचे की और धक्का दिया और घुटनों के ऊपर बिठा दिया. उसने अपनी पेंट की ज़िप को खोल दी और अपने लंड को बहार निकाला. वो तो एक गोडज़ीला था! मैंने सोचा की भला इतना बड़ा लंड मैं कैसे मुहं में ले पाऊंगा!

मैंने अपने मुहं को खोला लेकिन उसने मुझे वही पर रोक दिया. वो फोन पर अपनी पार्टनर के साथ लोकल लेंग्वेज में सेक्स चेट कर रहा था.

उसने उस लेडी के फोन पर कुछ कहने तक उसकी वेट की. और फिर मेरे मुहं में लंड को दे दिया. चलती हुई ट्रेन में लंड मेरे मुहं में था और ट्रेन की पटरी की आवाज में मेरी मोअनिंग दब सी गई थी.

मैं उसके लंड को ऐसे प्यार से और सेक्सी ढंग से चूसा जैसे की वो इस दुनिया का आखरी लंड हो. वो भी फोन के ऊपर मोअन कर रहा था. मैंने हाथ को ऊपर किया और उसकी छाती के बालों को सहलाने लगा. वो और भी गरम हो गया और पूरा लंड मूहं में घुसा के मुझे चोदने लगा.

उसने अब लंड को मेरे मुहं से निकाला और मेरे सर के बालों के ऊपर थोडा घिसा. फीर उसने अपने देसी लंड को मेरे लिप्स के ऊपर घिसा. मैं उसे किस कर रहा था. और फिर मैंने जबान को बहार निकाल के लंड को मुहं में ले लिया. वो मुझे टीज करते हुए बार बार मेरे मुहं से अपने लंड को बहार निकाल रहा था. मुझे भी ये सब में खूब मजा आया.

फिर मैंने उसके लंड के निचे के गुलाबजामुन को भी चाट लिए और वो पुरे मुहं में भर के मैं उन्हें कस कस के किस दे रहा था. वो अब और भी जोर जोर से मोअन कर रहा था. उसकी सांस टट्टे मुहं में लेने से रुक सी गई. उसको बहुत मजा आया और वो बोला, मेरी रंडी क्या लंड चूस रही हो तुम तो! पता नहीं, लेकिन शायद वो लेडी जिसके साथ वो सेक्स चेट कर रहा था उसे ऐसा लग रहा था की वो उसके लिए कहा गया था.

मैंने अब उसके लंड के सुपाडे के ऊपर जबान घुमा के उसके प्रीकम को चाट लिया. उसने फोन के ऊपर कहा, और जोर से चुसो मेरी रानी, अह्ह्ह मजा आ गया मेरी रंडी!

उसने अब एक हाथ को निचे कर दिया और मेरे बालों को हाथ में ले के घुमाने लगा. और फिर मेरे निपल्स को दबाने लगा. अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह उसके मुहं से आवाजें आ रही थी. मैंने उपर हो के उसे देखा. उसने मुझे वापस लंड पर धकेला और बोला, पूरा अन्दर ले ले मेरी रानी!

और फिर उसने कहा, पानी निकलने से पहले लंड को मुहं से मत निकालना मेरी जान.

मैंने अब दोनों हाथ से उसकी गांड को पकड लिया. उसकी गांड सेक्सी और सख्त थी. वो अब मेरे मुहं में एकदम जोर जोर से लंड के धक्के देने लगा था और पूरा लंड टटो तक मेरे मुहं में था. फिर उसने कहा मैं तेरे ऊपर ही अपना माल निकालूँगा. वो मुझे और फोन पर उस लेडी को जैसे साथ में ये कह रहा था.

उसने अपने लंड को अब मेरे मुहं से निकाला और वो अपने हाथ से उसे स्ट्रोक करने लगा. उसने अब लंड को मेरे चहरे पर रख दिया और बोला, आया रहा हैं मेरा माल, वेट कर मेरी रानी.

मैंने निचे उसके लंड के गुलाबजामुन को चाट लिए. वो और भी जोर जोर से लंड को हिलाने लगा था और फोन के ऊपर एकदम सेक्सी मोअन दे रहा था. मई जानता था की जिसके साथ वो सेक्स चेट कर रहा था उसे भी आज के सेशन में डबल ट्रिपल मजा आया होगा.

उसका पूरा बदन एक मिनिट के लिए जैसे कापं उठा. उसने मेरे बाल पकडे और मेरे चहरे के ऊपर लंड को जोर से दबा दिया. और उसके लंड की नली से गर्म गर्म वीर्य की पिचकारियाँ निकल पड़ी मेरे चहरे के ऊपर ही. बहुत लोगों को वीर्य की स्मेल से घिन आती हे, लेकिन मुझे वो सूंघ के बड़ा ही मज़ा आता है.

वो एकदम हांफ सा गया था और मेरे बालों को नोच रहा था. वो मेरे ऊपर जो अधिकार जमा रहा था वो मुझे अच्छा लग रहा था. फिर उसने एक हाथ से लंड को पकड के मेरे चहरे पर ठपकार सा दिया जिस से उसकी बची हुईं बुँदे भी बहार आ गई. सब का सब वीर्य उसने मेरे चहरे के ऊपर ही निकाला था.

फिर उसने मुझे कंधे से पकड़ के ऊपर कर दिया. उसने अपने रुमाल को बहार निकाला और मेरे चहरे के ऊपर से वीर्य को साफ़ किया. फिर उसने पानी मार के भी मेरा चहरा साफ़ कर दिया. फिर हम दोनों ने कपडे पहने.

मैंने कहा, मैं जाता हूँ बाद में तुम आना.

वो बोला ठीक है.

मैने बहार निकल के देखा तो कोई नहीं था इधर उधर. मैं धीरे से अपनी सिट पर आ बैठा. एक मिनिट के बाद वो भी आ गया, और वो बहुत खुश लग रहा था. ट्रेन के संडास में एक अजनबी को लंड चूसा के भला कौन खुश नहीं होता हैं!

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