सरोज आंटी की गांड मारी तेल लगा के

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दोस्तों मेरा नाम रवि सिंह है और मैं एमपी के भोपाल का रहने वाला हूँ. मैं सिम्पल 25 साल का युवक हूँ जिसे जिम में जा के खुद को शेप में रखने का क्रेज है. बात आज से करीब 13 -14 महीने पहले की हैं. एक रात को मैं जिम से वापस आया तो देखा की मेरे घर के दरवाजे के ऊपर ताला लटका हुआ था. मैंने बगलवाली सरोज आंटी का कमाड खड़का के पूछा की क्या मेरी माँ ने उनके वहां घर की चाबी दी थी. लेकिन आंटी ने मेरे को बोला की नहीं आज तो मेरे को चाबी नहीं दी है.

तो मैंने कहा कोई बात नहीं आंटी मैं बगल की सोसायटी में अपने दोस्त के घर हो आता हूँ. तो आंटी ने कहा अरे इतनी ठंड में कहाँ जाओगे आओ मेरे घर में आके बैठो और चाय पियो तब तक तुम्हारी माँ आ जायेगी. मैंने कहा ठीक है और मैं आंटी के घर चला गया. आंटी के घर पर भी कोई नहीं था उस वक्त. आंटी को पूछा तो उसने कहा की पति ऑफिस के काम से नीमच में हैं और उनकी बेटी विभा उनकी बहन के घर पर थी.

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मैं हॉल में था और आंटी बगल में किचन में खडी हुई चाय बनाते हुए मेरे से बातें कर रही थी. तभी आंटी के गेस का सिलिंडर खाली हो गया. आंटी ने मेरे को कहा बगल के स्टोर रूम से सिलिंडर ला दो मेरे को.

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मैंने कहा क्यूँ नहीं. मैं अपने हाथ से सिलिंडर को उठाया तो मेरे फुले हुए मसल्स के ऊपर आंटी की नजर पड़ी. आंटी ने मेरे बायसेप पर हाथ रख के कहा, ऐ वाह जिम का असर दिखने लगा है, कोई भी लड़की इसे देख के पक्का मोहित हो जायेगी.

सच कहूँ तो मैंने कभी सरोज आंटी से इसे बर्ताव की कभी उम्मीद नहीं की थी. वैसे वो शांत थी और कम ही बात करती थी. इसलिए मैंने कहा आंटी आप क्यूँ मजाक कर रही हो, ऐसा ही होता तो मैं आजतक बिना गर्लफ्रेंड का नहीं होता.

आंटी ने हंस के कहा, अब इतना जूठ तो ना बोली, ऐसे स्मार्ट लड़के की गर्लफ्रेंड न हो वो बात मैं नहीं मानती हूँ.

मैने कहा सच में मेरी आजतक कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही है.

और ये बात मैंने थोडा जोर दे के कही थी.

और मैं और आंटी अब नए सिलिंडर को लगाने लगे. और पता नहीं तब कैसे मेरा हाथ फिसल के आंटी के बूब्स के ऊपर टच हो गया. वो एकदम से चौंक गई.

मैंने उसे बहुत बार सोरी कहा क्यूंकि मेरे को अच्छा नहीं लगा वो. तो आंटी ने कहा अरे जानबूझ के किया हो उतना सोरी क्यों कह रहे हो, छोड़ो.

और फिर वो जो बोली वो थोडा शोकिंग था. आंटी ने कहा शायद मैं ही कुछ ज्यादा करीब आ गई थी तेरे इसलिए टच हो गया. और फिर मुझे स्माइल दे के वो बोली, इतना हेन्डसम और बल्कि है और फिर भी आज तक तेरी गर्लफ्रेंड नहीं बन पाई!

फिर आंटी ने कहा वैसे तुम हो ही बुधधू मेरी आँखों की भाषा नहीं समझते?

और ये सुन के मैं एकदम से चौंक गया. और मैंने कहा नहीं मेरे को कुछ समझ में नहीं आया.

अब आंटी ने एकदम से बर्फ पिगला दी हम दोनों के बिच की और बोली मैं तो कब से तुम्हें पसंद करती हूँ और ना जाने कब से सोचती हूँ कुछ अच्छा वक्त बिताऊं तुम्हारें साथ. लेकिन आज तक तो कभी तुमने मेरी आँखों में वो सब पढ़ा ही नहीं.

मैं एकदम बबुचक के जैसे आंटी को देख रहा था. तो वो बोली, अब भी नहीं समझे क्या यार?

मैंने कुछ नहीं कहा तो वो आगे बोली, यही वजह है की कोई लड़की नहीं पटा सके तुम आजतक, तुम्हे फिमेल की फीलिंग्स ही समझ में नहीं आती शायद तो.

मैने कहा आंटी आप मेरिड हो आप की मेरे से थोड़ी ही छोटी एक बेटी है भला आप के साथ मैं ये सब कैसे सोच लेता?

और ये बात करते हुए निचे मेरे लंड में अकड़ आने लगी थी और वो मेरी पेंट में चिभ रहा था. आंटी ने भी देख लिया की मेरा खड़ा हो रहा था. वो बोली क्यूँ जिसकी मेरेज हो जाती है क्या उसे फिलिंग नहीं होती है? और इतने भोले ना बनो वैसे मैं ये जानती हूँ की तुम तिरछी नजरों से मेरे बदन के मरोड़ों को देखते हो. और मेरे को ये भी पता है की तुम छत पर एक्सरसाइज करते वक्त अक्सर अपना हिलाते हो, दो बार तो मैंने ही देखा है!

अब मेरे को लगा की शायद आंटी ने बहुत फील्डिंग की है मेरे पीछे. आंटी अब प्लेट में चाय के साथ नास्ता भी ले के आई और उसने मेरी जांघ पर हाथ रख के बोला, घबराओ मत ये सब नोर्मल है इस उम्र में, ऐसा सब के साथ होता है. और फिर उसके हाथ मेरी जांघो पर घुमने लगे थे. मेरा लंड अब खड़ा हो के पेंट के उपर आकार बना चूका था. आंटी ने मेरी तरफ देखा और फिर उसने लंड के ऊपर अपने हाथ को रख दिया. हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

आंटी के स्पर्श से तो लंड और भी खड़ा हो गया. और आंटी ने अब मेरी ज़िप को खोल के लोडे को बहार निकाल लिया. और वो उसे देख के काफी खुश लग रही थी. आंटी ने अब अपने पल्लू को हटा के अपने ब्लाऊज के ऊपर से ही अपने बूब्स के ऊपर मेरे लंड को टच करवा दिया. दोस्तों वो फिलिंग वंस इन ध लाइफटाइम थी. आंटी ने अब निचे झुक के मेरे लंड को अपने मुहं की ठंडक दे दी. बाप रे क्या मस्त तरीके से वो लंड को मुहं में भर के मेरे को देख रही थी. मेरे तो लंड में जैसे आग लग चुकी थी चुदाई की आंटी का ये रूप को देख के.

आंटी ने पुरे लंड को अपने मुहं में भर लिया और जोर जोर से वो उसे सक कर रही थी. अब मैंने आंटी को खड़ा कर दिया. आंटी ने कहा रुको. और वो जा के अपने घर के मुख्य दरवाजे को अंदर से बंद कर के आ गई. तब तक मैंने अपने सब कपडे निकाल दिए थे और मैं किचन में ही डाइनिंग टेबल पर नंगा हो के  बैठा हुआ था. मेरा लंड छत को देख रहा था और आंटी ने उसको देखा तो उसकी चूत में भी पानी चूत गया.

आंटी ने आ के अपने कपडे खोलने चालू कर दिए. एक मिनिट में वो भी नंगी हो गई. फिर से वो मेरे घुटनों के पास बैठ के लंड को चूसने लगी. आंटी ने गले तक लंड को भर के चूसा और फिर बोली, चलो अब मेरे बोबे चूस दो.

मैंने दोनों हाथ से आंटी को कंधे पकड़ के खड़ा कर दिया. और फिर उसके बूब्स को खूब मसले. वो कराह उठी मैं उतने जोर से उसके बोबे मसल रहा था. आंटी के निपल्स को मुहं में ले के अब मैं उन्हें चूसने लगा था. आंटी सिसका उठी और फिर वो बोली, ला दे दे अपना लोडा अब मेरी चूत के अंदर मेरे राजा, आज अपनी आंटी की सब प्यास को बुझा दे.  हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

आंटी डाइनिंग टेबल को पकड के लेट गई. आंटी की सेक्सी बड़ी गांड मेरे सामने थी. मैंने निचे हो के उसके चूतडों पर पहले तो चुम्बन दे दिया. आंटी के मुहं से आह निकल गई मजा आ गया था उसको. आंटी की गांड को खोल के मैंने धीरे से उसकी चूत में दो ऊँगली कर दी. और उसे हिलाने लगा. एक मिनिट में ही सरोज आंटी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और अब वो मेरे से मिन्नत करने लगी थी लंड अन्दर डालने के लिए.

सरोज आंटी ने अपने हाथ से चूतडो को खोला और मैंने उसकी चूत के ऊपर अपना लंड रख दिया. आंटी के मुहं से आह निकल गई और उसने बोला बहुत सालों के बाद लंड की गरम गरम टच मेरी चूत को मिली है!

और फिर मैंने जोर से पुश कर दिया अन्दर. आधे से ज्यादा लंड आंटी की चूत में घुसा दिया और फिर वो बोली, डाल दो पूरा के पूरा.

मैंने कंधे के ऊपर किस कर के लंड को धक्का मारा. आंटी की आवाज में बड़ी ही प्यास थी और वो अब अपने चूतडों को मेरे लंड पर मारने लगी थी. मैंने आंटी की चुदाई चालू कर दी थी. और वो भी जोर जोर से घिस रही थी लंड के उपर. आंटी की चूत से पच पच की आवाजें आ रही थी और उसके अंदर से पानी भी चूत रहा था. मेरे को तो बड़ा मज़ा आ रहा था आंटी की बूढी चूत को चोदते हुए.

मैंने अब स्पीड को और ज्यादा कर दिया था और आंटी भी जोर जोर से अपनी गांड को मजे से हिलाने लगी थी. अब मेरा मूड बना आंटी की गांड मारने का. मैंने आंटी को ये बात बोली तो उसने कहा नहीं पीछे बहुत दर्द होता है लंड लेने से. मैंने कहा तेल लगा के गांड मारूँगा तो दर्द नहीं होगा और अगर तेल लगा के मारने पर भी दर्द हुआ तो निकाल लूँगा वापस.

आंटी की चूत से मैंने अब अपने लंड को निकाल लिया. और आंटी कटोरी के अंदर तेल ले के आ गई. मैंने अपने हाथ से आंटी की गांड पर तेल लगा दिया. फिर मैंने कुछ तेल ले के अपने लंड को भी लगाया. तेल की वजह से मेरा लंड एकदम चमक रहा था. अब इस चमकीले लंड को मैंने आंटी के होल पर लगा दिया. आंटी ने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा हुआ था और उसने सुपाडे को सही सेट कर दिया. मैंने हौले से धक्का दिया तो तेल की चिकनाहट की वजह से लंड अंदर चला गया. आधे से भी कम लंड अंदर गया था लेकिन आंटी दर्द से छटपटा रही थी और मेरे को कह रही थी की बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने आंटी को कहा अब जवान लड़के का लंड है इतनी जल्दी से मजा तो नहीं देगा पहले थोडा दर्द ही देगा.

ये सुन के वो दर्द में भी स्माइल देने लगी. अब मैंने उसके दोनों बूब्स को पकडे और फिर एक झटके में पौना लंड गांड में उतार दिया. आंटी के मुहं से अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह उह्ह्ह होने लगा था.  हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

लेकिन मैं अब रुकनेवाला नहीं था वो बात उसे भी पता थी. मैं अपने लंड को जोर जोर से उसकी गांड में धकेलता गया और आंटी की गांड मारता रहा.

पुरे 10 मिनट तक मैंने आंटी की गांड चोदी और अपने लंड का सब पानी उसके अंदर ही निकाल दिया. फिर मैंने लंड को आंटी की गांड से निकाल के उसके मुहं में दे दिया. आंटी समझ गई थी की उसे लंड साफ़ करना था.

फिर हम दोनों कपडे पहन के हॉल में बैठे. आंटी ने दरवाजा खोल दिया. और पांच मिनिट के बाद मेरी माँ भी आ गई. मैं आंटी से फिर मिलने का वादा कर के अपने घर चला गया. उस दिन से मेरी इस पड़ोसन सरोज आंटी के साथ मेरी निकल पड़ी और उसने मेरे से अलग अलग ना जाने कितने ही पोज में अब तक सेक्स किया है. मैं आज भी उसकी चूत और गांड की चुदाई करता हूँ!

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