काला खट्टा में सेक्स की दवाई दे के मुझे चोदा


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हेल्लो देवर जी कैसे हो आप सब! मैं आप की सीमा भाभी मैं मुंबई की रहनेवाली हूँ. मैं बहुत ही सेक्सी औरत हूँ और मेरे मोहल्ले के सभी लोग मेरी बड़ी चूची और सेक्सी गांड के दीवाने है.

मेरे पति काम में बहुत ही बीजी रहते है और मैं खूब चुद्वाती हूँ दुसरे लोगों से. मुझे बस लंड चाहिए मैं किसी का भी लंड अपनी चूत में ले के चुद्वाती हूँ.

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आज की इस sex कहानी में मैं आप को बताउंगी की कैसे मैंने अपने पति के दोस्त का लंड लिया था और उस से चुदवाया था. और उस दिन तो मुझे वो लंड लेने में काफी मजा आ गया था. मेरी उम्र 35 साल है और मेरा फिगर 38 32 40 है.

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और जो भी मुझे एक बाद देखता है तो वो मेरे बदन को फिर अकेले में बैठ के सोचता जरुर है. मैंने पहला लंड अपनी कोलेज लाइफ में लिया था. और फिर मैंने वापस मुड के नहीं देखा कभी भी. मैं अक्सर लोड़े लेती ही रही हूँ शादी के पहले और शादी के बाद भी.

कुछ दिन पहले मेरे पति अपने इस दोस्त को ले के हमारे घर आये थे. और मैं उनको चाय पिला के बैठी थी. वो मेरी चूची देख रहे थे. मैंने समझ गई थी की मेरे पति के दोस्त के दिमाग में मेरे लिए क्या ख्याल थे उस वक्त. और वो थे इतने हेंडसम की मैं खुद भी उनसे चुदने के लिए रेडी ही थी. और मैं खूब चुचिया दिखाने लगी अपने पति के दोस्त को. और उसकी नजर भी बार बार वही पर चिपक सी रही थी.

मैंने थोड़ी बार की और वो बार बार में तरफ वो वाली नजर से ही देख रहे थे. मेरे मन में भी उनके लिए गंदे गंदे विचार आ रहे थे की कैसे वो मुझे खड़े खड़े, लेटे लेटे और मुहं में लंड दे के रहे हैं. उस दिन तो कुछ नहीं हुआ और पति और दोस्त निकल गए. मैंने दरवाजे पर ड्राप करने के वक्त उन्हें कहा की आते रहना भाई साहब.

और वो मुझे देख के बोले हां अब तो जान पहचान हो ही गई है इसलिए आना ही पड़ेगा. मैंने उसको देखा तो वो मेरे बूब्स को ही देख रहा था.

मेरे मन में भी उसका लंड लेने की लालच अब बढती जा रही थी. कुछ दिन ऐसे ही निकल गए. मैं तो उन्हें भूल भी चुकी थी. फीर मेरे पति को ओन साईट के लिए ग्रीस जाना हुआ. मैं नहीं गई क्यूंकि मेरे मम्मी की तबियत खराब थी इसलिए मुझे अक्सर मइके जाना पड़ता था.

पति को गए हुए कुछ डेढ़ हफ्ता हुआ था. और मैं बहुत ही चुदासी हुई थी. रोज मार्केट से अपनी चूत में दाने के लिए भिन्डी, मुली, ककड़ी ले के आती थी. और फिर शाम को मैं बहार खड़ी हो के बाल सुखा रही थी वो मेरे पति के वही दोस्त (अमित) आ गए. अमित को देख के मैने बहुत खुश हुई. मुझे लगा की शायद चुदने का अवसर बन जाए उनके साथ.

वो आये और बोले भाभी जी भैया का फोन वोन आया की नहीं?

मैंने कहा हां डेली आता हैं.

वो बोले, मेरी याद देना.

और फिर वो बोले चलो फिर मैं जाता हूँ. लेकिन ये कह के भी उसके पाँव जाने के लिए आगे नहीं बढे थे. मुझे देख के वो जैसे कुछ जानना चाहता था. मैंने कहा, आइये ना चाय तो पी के जाएँ.

वो बोला, आप रात को फ्री हो तो मैं मार्किट से सरबत ले के आता हूँ.

मैंने एक पल के लिए सोचा और हाँ कर दी.

वो बोले, मैं 9 बजे के करीब आता हूँ.

मैं समझ गई की आज मेरी प्यासी चूत को कुछ मिलने को है. मैंने बाथरूम में जा के अपनी झांट बनाई कुछ देर पहले ही मैं नाहा के आई थी लेकिन झांट बना के फिर से बाथ लिया. खाना मैंने फट फट पका लिया. मेरा बेटा सन्नी जो 5 साल का है. उसको मैंने खिला के मेरी ननंद के घर भेज दिया और उसे कहा की कल सन्डे है इसलिए वही पर सो जाना तुम.

वो गया और मैं बेसब्री से अब अमित जी की वेट करने लगी. करीब सवा 9 बजे अमित आये. उनके हाथ में पोलीथिन की बेग थी. और वू डेशिंग कपडे पहन के आये थे. उनका खड़ा करने के लिए मैंने भी सेक्सी नाईटी पहनी थी जिसमे मेरी ब्रा साफ़ साफ़ दिख रही थी. वो मुझे इन कपड़ो में देख के हक्का बक्का ही थे. मुझे ऊपर से निचे देख के उसने कहा, यु लुक डेशिंग भाभी.

मैंने थेंक्स बोला.

वो बोले जाओ आपग्लास ले आओ मैं कालाखट्टा ले के आया हूँ.

मैंने दो ग्लास लगाए और उन्होंने शरबत निकाला उसके अन्दर. वो दो अलग अलग पाउच में बर्फ डाल के पेक करवा के ले के आये थे. मेरे लिए काला खट्टा और अपने लिए ओरेंज.

हम दोनों ने एक दुसरे को देखते हुए ही शरबत का मजा लिया. और फिर वो बोले, भाई के बिना तो मुश्किल होगी आप को घर के अंदर.

मैंने कहा, घर में तो नहीं वैसे कोई मुश्किल लेकिन पर्सनली मुश्किलें है!

वो हंस के मेरे पास आ खड़े हुए और मेरे कंधो के ऊपर हाथ रख के बोले, अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता देना!

मैं उनकी तरफ देख रही थी और मैंने देखा की उनका लंड खड़ा हुआ था. और वो मंद मंद स्माइल भी दे रहे थे. पता नहीं मुझे क्या हुआ की मैंने अपने हाथ को लंड के ऊपर रख दिया और उसे महसूस किया. वो कुछ नहीं बोले और अपनी पेंट की जिप को सीधे मेरे लिए खोल दिया. अमित का लंड बहार आ गया जो एकदम कडक था और उसका सुपाडा एकदम मोटा था!

मैंने सीधे ही उसे अपने मुहं में ले लिया और चूसने लगी. वो भी अपनी झांट बना के आया था और उसका लंड एकदम चिकना था. मैंने कुछ देर लंड चूसा और फिर उसने मुझे खडा किया. मैंने अपनी नाइटी की डोरी को खोल दी और वो निचे गिर पड़ी. मेरी ब्रा के हुक को अमित ने जल्दी ही खोल दिया.

वो निचे हो के मेरी पेंटी के ऊपर से ही चूत को चाटने लगा. मैंने बड़ी नोटी स्टाइल के साथ पेंटी को निचे सरकाया. अमित कुत्ते के जैसी अपनी जबान को बहार निकाल के मेरी चूत को जोर जोर से चाटने लगा. मेरी चूत में पानी आ चूका था.

अमित ने मुझे उल्टा लिटा दिया और वो मेरी कमर से ले के मेरी गांड, कंधे और गले के पीछे के हिस्से को जोर जोर से किस करने लगा. और फिर मुझे उसका लंड अपने कूल्हों के ऊपर महसूस हुआ अमित ने कुल्हे खोले और अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दिया. सच में वो इतना मस्त अनुभव था अमित का लंड लेने का की मैं आप को शब्दों में बता नहीं सकती हूँ.

और वो चोदने में भी इतना मस्त था की मैं सब कुछ भूल के उसकी हो गई. उसने मुझे घोड़ी बना के, अपनी गोदी पर चढ़ा के और दिवार पकडवा के ऐसे अलग अलग पोज में खूब देर तक चोदा. और फिर मेरे छेद में अपना वीर्य निकाल के ही सो गया.

कुछ देर बाद जब मैं उठी तो वो भी उठा और मुझे किस करने लाहा. उसने मुझे बोला की मेरे काला खट्टा में उसने सेक्स की दवाई मिलाई थी. मैंने उसको कहा की दवाई की जरूरत थी ही नहीं मुझे बोल देते तो मैं ऐसे ही लंड ले लेती तुम्हारा. हम दोनों हंस पड़े और एक दुसरे से चिपक गए!

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