ट्रक ड्राईवर और क्लीनर ने माँ को चोदा


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दोस्तों मेरा नाम अनिल हे और मैं अभी 10वी कक्षा में पढता हूँ. मेरी मम्मी का नाम काजल हे और उसकी उम्र 35 साल हे. उनकी बहुत छोटी उम्र में मेरे पापा सज्जन कुमार से शादी हुई थी. पापा ने बढती उम्र के साथ शराब और शबाब को अपना दोस्त बना लिया. जिसकी वजह से दोनों के बिच में बहुत झगडे होने लगे. मुझे याद हे की जब से मैंने होश संभाला हे मम्मी साल में एक बार तो मुझे ले के अपने मइके चली जाती हे.

लेकिन पापा फीर वहां आ के मम्मी को सोरी बोल के हमें वापस ले आते हे. वो दोनों एक दुसरे को प्यार बहुत करते हे लेकिन उनका सेक्स जीवन सामान्य नहीं हे. शायद पापा की रंडीबाजी और शराबबाजी की वजह से ही.

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और इस लत  ने ही एक दिन मम्मी की बुरी हालत कर दी थी. वो आज की इस कहानी में मैं आप को बताने जा रहा हूँ. एक दिन मम्मी ने अपनी बेंगल यानी की चूड़ियों के लिए पापा से पैसे मांगे. लेकिन पापा ने नहीं दिए. शाम से ही दोनों के बिच में झगड़ा चल रहा था. फिर लेट इवनिंग में पापा थर्रा लगा के आये तो झगड़ा बढ़ गया. मम्मी मुझे ले के चल पड़ी. रोड पर आई तो कोई ऑटो और टेक्सी नहीं थी. तभी एक ट्रक आया जिसको एक बूढा सरदार चला रहा था. और उसकी साइड में एक क्लीनर बैठा हुआ था. उसके कपडे काफी गंदे थे. मम्मी ने हाथ किया.

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ट्रक वाले ने रोक के पूछा, किधर जाना हे भाभी जी?

मम्मी: जी हमें शिमला हाइवे पर जाना हे.

ट्रक का ड्राईवर बोला हम उधर ही जा रहे हे आप आ जाओ.

क्लीनर ने दरवाजा खोला और पहले मम्मी ने मुझे ऊपर चढ़ाया और फिर वो भी आ गई. मम्मी ड्राईवर की बगल में बैठी हुई थी. उस वक्त माँ ने सलवार कमीज पहना था और उसका नेक एकदम ढीला था. मम्मी जब ट्रक में चढ़ी तब क्लीनर ने उसके बूब्स देखे थे शायद. और वो वही देखता रह गया था. ट्रक का ड्राईवर भी अपनी गाडी को चलाते हुए अक्सर अपनी निगाहों से मम्मी का क्लीवेज देख रहा था.

ड्राईवर: और भाभी अकेले कहा?

मम्मी: जी मैं अपने मइके जा रही हूँ.

ड्राईवर: मेरा नाम रतन सिंह हे और ये मेरा क्लीनर बुलाराम.

मम्मी: मेरा नाम काजल हे.

रतन: बहुत चंगा नाम हे जी बिलकुल ही आप की आँखों के जैसा.

ये सुन के मम्मी ने रतन सिंह को देखा तो वो दोनों की आँखे टकरा गई. रतन ने अपनी लुंगी में पड़े हुए अपने लंड को उसी समय पर खुजा दिया. मम्मी अपनी हंसी को रोक नहीं पाई. वो मुझे छोटा बच्चा समझ रही थी लेकिन मैं उतना तो समझता था की वो मम्मी को लाइन दे रहा था और वो भी एकदम खुल्लम खुल्ला.

कुछ देर बार रतन सिंह ने गाडी को एक ढाबे के ऊपर रोक दिया. और बोला, चलो रोटी शोटी खा लेते हे. बुला तू लड़के को उतार. आओ भाभी आप इधर से उतर जाओ.

मम्मी ने कहा, जी हम खा के आये हे घर से.

रतन: जी हमारे साथ रुखा सुखा खा ही लो आप.

मम्मी क्लीनर वाली साइड से उतर रही थी लेकिन रतन सिंह ने कहा इधर आ जाओ मैं हाथ पकड़ता हु आप के. फिर वो साइड में हुआ. मम्मी जैसे ही उसकी सिट के पीछे से निकलने को जा रही थी तो वो आगे को हुआ थोडा और जानबूझ के उसने अपने लंड को मम्मी की गांड पर टच करवा दिया. मम्मी ने उसे देखा लेकिन वो कुछ नहीं बोली. मुझे ऐसे था की शायद मम्मी ढाबे के ऊपर उतर के उन्हें मन कर देंगी की हमें नहीं आना आप के साथ में.

मम्मी जब निचे उतरी तो रतन सिंह ने उसकी क्लीवेज को देखा और साले ने अपनी नजर वहां से हटाई ही नहीं. मम्मी ने भी उसे देखा और फिर उसने अपनी क्लीवेज को हाथ से ढंकना चाहा. रतन ने फिर से अपनी लुंगी में हाथ कर के अपने लंड को खुजाया. मम्मी स्माइल दे रही थी.

हम लोग बहार चारपाई के ऊपर ही बैठे हुए थे. खाने में अच्छा ऑर्डर किया रतन ने. हम सब ने पेट भर के खाया और फिर ऊपर एक एक ग्लास लस्सी भी पी ली. मुझे तो बहुत भूख लगी थी. मम्मी ने जूठ ही कहा था की हम खा के निकले थे.

खाने के बाद रतन सिंह गल्ले पर गया और अपने लिए सिगरेट ली, बुलाराम के लिए बीडी और मम्मी और मेरे लिए मीठे पान. उसने मुझे पान दिया. फिर मम्मी को पान देते वक्त उसने जानबूझ के उसके हाथ को टच किया. मम्मी ने मेरी तरफ देखा. मैंने नजर वहां से हटा ली ताकि उसे स्पेस मिले.

मम्मी और उसकी पता नहीं आँखों ही आँखों में क्या बात हुई दो मिनिट में. रतन ने बुलराम से कहा, बुला तू एक काम कर पीछे मुन्ने को ले के सोजा. मैं और भाभी आगे सो जाते हे.

मैं मन ही मन सोच रहा था की खाने के बाद अब एकदम से सोने की बात कहाँ से आ गई. रतन ने मम्मी से कहा, भाभी जी आगे का 50 किलोमीटर रस्ता खराब हे चोर लुटेरे ट्रक लुट लेते हे और औरतों को भी नहीं छोड़ते हे. आप साथ में ना होते तो हम तो निकल लेते लेकीन आप के साथ जाना ठीक नहीं हे. कुछ घंटे यहाँ और भी ट्रक आयेंगे फिर सब साथ में निकलेंगे तब तक थोडा आराम कर लेते हे.

शायद वो लोगो ने मुझे चूतिया बनाने के लिए ही ये स्टोरी बनाई थी. बुलाराम आगे से एक गोदड़ी ले के निकला और एक तकिया भी. वो लोगों की ट्रक में कुछ मशीन भरा हुआ था लेकिन फिर भी काफी जगह खाली बचती थी साइड में. मैं और बुलाराम पीछे सो गए. लेकिन मैं जानता था की आगे मेरी माँ चुद रही होगी फिर मुझे नींद कैसे आती भला.

कुछ ही मिनटों में मैंने आँखे बंद कर के सोने की एक्टिंग की. और बुलाराम फिर धीरे से खड़ा हुआ. वो आगे ट्रक के केबिन में झाँकने लगा एक छेद से. मैंने भी सोचा की लाओ मैं भी देखूं माँ को चुद्वाते हुए. मैंने खड़ा हुआ तो बुलाराम की हवा निकल गई. मैंने हाथ को मुहं पर रख के उसे चूप रहने का इशारा किया. बुलाराम कुछ नहीं बोला.

एक दुसरे छेद से मैंने आँख लगा के देखा तो अन्दर रतन ने अपनी लुंगी उतार दी थी. वो गियर के शाफ़्ट के ऊपर की जगह के ऊपर बैठा हुआ था. मम्मी के बाल खुले हुए थे और वो उसका लंड पकड़ के हिला रही थी. फिर रतन ने उसे खिंच के अपना लोडा उसके मुहं में दे दिया. रतन सिंह का लंड कम से कम 8 इंच लम्बाई में और 3 इंच चौड़ाई में था. शायद मम्मी को इतना बड़ा लंड देख के और भी चुदास चढ़ गई थी.

मम्मी आधे लंड को ही अपने मुहं में ले पा रही थी. लेकिन आधे लंड को भी वो एसे सेक्सी ढंग से चूस रही थी जिस से रतन के होश ही उड़े हुए थे. वो आँखे बंद कर के आह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह कर रहा था.

कुछ देर तक मम्मी ऐसे ही लंड को चुस्से लगाती रही. फिर रतन ने उसे अपने पास लिया और उसके कमीज को ऊपर से खोला और मम्मी के बूब्स को चूसने लगा. मम्मी ने उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और वो उसे हिला रही थी. रतन की आह निकलती हुई सुनी जा सकती थी पीछे भी. बुलाराम ने अपने लंड को बहार निकाल दिया था और वो उसे हलके हलके से मल रहा था. वैसे मम्मी की ये क्सक्सक्स फिल्म को देख के खड़ा तो मेरा भी हो गया था!

रतन ने अब मम्मी की सलवार का नाडा खोला और उसे ड्राईवर की सिट के पीछे की सिट के ऊपर लम्बा कर दिया. मैं और बुलाराम उन दोनों से एक डेढ़ फिट ही दूर थे लेकिन बिच में केबिन की दिवार होने की वजह से वो हमें नहीं देख सकते थे.

रतन ने मम्मी की पेंटी को फाड़ दिया और उसे कुत्ते के जैसे सूंघने लगा. फिर उसने उस पेंटी को अपने कडक लंड के ऊपर घिसी. मम्मी के बूब्स को पकड़ के उसने कहा. तुम को देख के ही मैं समझ गया था की तुम बहुत टाइम से चुदी नहीं हो और प्यासी हो.

मम्मी ने कहा. तुमने जब लुंगी में हाथ डाल के लंड को खुजाया तभी मैंने भी तय कर लिया था की इस बड़े लंड को मैं ले लुंगी अपनी बुर में.

रतन मेरी माँ के ऊपर झुका और उसने अपने लंड को चूत के ऊपर लगा दिया. मम्मी के मुहं से एक जोर की आह निकल गई जिसे रतन सिंह ने अपने हाथ से दबा दी. उसका लंड माँ की चूत में बवाल मचाते हुए घुसा था. वो सरदार का लंड सच में काफी बड़ा था और किसी भी चूत को वो दर्द दे सकता था.

मम्मी को पकड़ के वो जोर जोर से धक्के देने लगा और बोला, साली क्या कडक चूत हे तेरी चोदने में मजा आ रहा हे. मम्मी भी अपनी कमर वाले हिस्से को हिला हिला के उसके लंड को एन्जॉय कर रही थी.

कुछ देर ऐसे निचे लिटा के चोदने के बाद मम्मी को इस ड्राईवर ने घोड़ी बना दिया. फिर पीछे से अपना लोडा उसने मम्मी की चूत में पेल दिया. मम्मी अपनी हॉट बड़ी एस को हिला रही थी और रतन सिंह उसे जोर जोर से चोदने लगा था. रतन सिंह माँ के बूब्स को मसल रहा था और उसको कंधे से पकड के जोर जोर से अपने लंड के ऊपर खिंच के हिला रहा था.

कुछ देर की चुदाई के बाद उसके लंड से ढेर सारा वीर्य निकल के मम्मी की चूत में ही निकल गया. मम्मी शांत हो गई और रतन ने धीरे से अपना लोडा निकाल लिया. रतन ने अपने शर्ट से पांच सो का नोट निकाला तो मम्मी ने कहा, नहीं नहीं मुझे पैसे नहीं चाहिए.

रतन ने कहा, ले लो कोई बात नहीं हे.

मम्मी ने कहा, मैं रंडी नहीं हूँ, सिर्फ लंड की भूखी थी.

रतन ने कहा, फिर एक काम और करो मेरा.

मम्मी ने कहा क्या?

रतन ने कहा, मेरे क्लीनर का भी बड़ा लंड हे, तुम चाहो तो मैं पीछे जा के उसे भेजता हूँ.

मम्मी ने कहा, वो तो काफी गन्दा हे.

रतन ने कहा, उसके सिर्फ कपडे गंदे हे लंड तगड़ा हे.

मम्मी बोली, मैं उसे बिना कंडोम के नहीं चोदने दूंगी.

रतन ने कहा, अरे कंडोम लगा लेगा वो. उसकी जेब में एक पेकेट होता ही हे हमेशा.

फिर रतन अपने कपडे ठीक कर के निचे उतरा. मम्मी ने सलवार नहीं पहनी थी सिर्फ कमीज से अपने बूब्स को और पेट को ढंक लिया था. रतन पीछे से ऊपर चढ़ा उतने में मैं और बुलाराम सोने की एक्टिंग करने लगे थे. रतन ने बुलाराम को हिलाया और बोला, जा अब तू हवा पानी चेक कर आ मैं यहाँ सोता हूँ.

बुलाराम खुश होते हुए निचे उतरा. मैं जानता था की वो मेरी माँ की चूत की ही हवा पानी चेक करने के लिए गया था.

आधे घंटे के बाद वो वापस आया. रतन ने मुझे हिलाया और बोला, चलो अब हम निकलेंगे बेटा.

मैने कहा, वो जो गाड़ियां आने वाली थी वो आ गई.

रतन ने कहा नहीं लेकिन आज कोई मंत्री इस रास्ते से जा रहा हे इसलिए रस्ते पर बहुत पुलिस वाले हे इसलिए कोई चोर डाकू नहीं आयेंगे.

अब मैं उसे कैसे कहता की मुझे पता है की जो दो डाकू को आ के मेरी माँ की चूत मारनी थी वो तो अपना काम कर के निकल चुके हे. हम सब लोग आगे चढ़े. मम्मी को और मुझे हाईवे पर ऑटोस्टेंड पर छोड़ के वो निकल रहे थे तो माँ ने उसे अपना नम्बर दिया और कहा, आप इधर से गुजरो तो फोन कर देना मुझे.

मैं समझ गया की माँ को इस बूढ़े सरदार का लंड पसंद आ गया था और वो आगे भी उसके लंड से अपनी चूत को चुदवाने की चाह रखती थी!!!

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