जोर जोर से चोदो! और चोदो! फाड़ डालो मेरी चूत


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मेरा नाम कोमल वर्मा है। मैं पंजाब के एक एक छोटे से गांव में रहती हूँ। मेरे गाँव का नाम शाह पूर है। मेरा घर मेरे गाँव के किनारे है। मेरे घर के बगल में एक आम का बगीचा है। मेरे को वो बहोत अच्छा लगता था। मैं अक्सर वहाँ जाया करती थी। मेरे गाँव के सारे लड़के मेरे चूत के पीछे पड़े रहते थे। लेकिन मेरी चूत बस एक ही लंड के नाम थी। उस लंड के मालिक का नाम अमनदीप था। मेरे को वो बहोत पसंद था। मेरी मुलाक़ात उससे दो साल पहले हुई थी। मेरे को देखते ही वो फ़िदा हो गया था। मेरी उम्र उस समय 22 साल की थी। मेरी गदराई हुई जवानी का मजा किस प्रकार से लिया। मै आपको अपनी कहानीं में बताती हूँ।

फ्रेंड्स मै बहुत ही अच्छे घराने से थी। गाँव में माँ बाप की बहोत ज्यादा रेपोटेशन थी। मैं भी उनकी इज्जत को बचाकर चुदवाने को तड़प रही थी। मेरी जवानी की तड़प बढ़ती ही जा रही थी। गांव के सारे लड़के काले कलूटे थे। एक दिन मैं छत पर बैठी हुई थी। वो अपने बगीचे में कुछ देर के लिए घूमने आया था। उसकी नजर मेरे पर पड़ी। मेरे को वो एक टक लगाए देखता ही रह गया। मेरे उभरे बूब्स को देखा तो देखता ही रह गया। अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर मेरी जवानी को निहार रहा था। मेरे को भी वो पसंद आ गया। गांव के सारे लड़को से वो अलग था। वो गांव पर बहुत कम ही रहता था। मैंने उसे पहली बार देखा था। वो पढ़ाई करने के लिए इलाहबाद रहता था। मेरी चूत चुदने को मचलने लगी। किसी तरह से उससे पट जाना चाहती थी। मैंने भी उसकी तरफ देखा। कुछ देर तक ये कार्यक्रम चला। अमनदीप मेरे को देख कर फ्लाई किस किया। मैंने भी जबाब दे दिया। वो भी समझ गया रास्ता क्लियर है। मेरे को देखने के लिए वो रोज अपने बगीचे में आने लगा। एक दिन मैं घर के बाहर ग्राउंड में खड़ी थी। मेरे घर और उसके बगीचे के बीच में बस एक छोटी सी दीवाल की दूरी थी। मेरे घर में उस दिन पूजा थी। घर के सारे लोग अंदर काम करने में व्यस्त थे। मै ही अकेले बाहर खड़ी थी। मेरे को वो देख कर बड़ी अजीब अजीब इशारे कर रहा था। मै उसके पास दीवाल से चिपक कर खड़ी हो गयी। मेरी चुदने की तड़प को वो भी समझ रहा था।

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मै: कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?
अमनदीप: मेरा बगीचा है। मैं अपने बगीचे में कही भी रहूं तुमसे क्या मतलब है!!
मै: सॉरी मेरे को पता नहीं था।
इस तरह से हम दोनों ने अपना अपना इंट्रोडक्शन दिया। कुछ ही देर में हम दोस्त भी बन गए। अब बारी थी इस दोस्ती में रंग भरने की। ऐसे भी पहले से मै 
गोरी गोरी दूध की तरह सफेद माल थी। मेरे घुंघराले बालो को देखने के लिए वो दूसरे दिन भी आ गया। मेरे को लगा की अब उसको अपना दूध पिला ही देना चाहिए। उसकी तरफ आकर्षित होकर मै भी अपने लटके झटके दिखाने लगी।

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अमनदीप भी काफी गोरा था। उसका कसा हुआ भरा शरीर देखकर कोई भी लड़की अपनी चूत हसी ख़ुशी से दे दे। उस दिन बड़ा ही रोमांटिक मौसम था। हवा चल रही थी बादल भी थे। इस मौसम में मेरे को ज्यादा चुदने की चाह होती थी। शाम को मैं घूमने अपने घर से बाहर आई। मेरे घर से एक रास्ता गुजरता था। मै उसी पर अकेले ही घूम रही थी। 500 मीटर चलने के बाद मेरे को एक छोटा सा पुल दिखने लगा। क्या पता था की मेरी चूत आज इसी पुल पर फटने वाली है। मैं बैठे बैठे मौसम का आनंद ले रही थी। तभी मेरे को अमनदीप दिखा। मैंने आवाज दी अमन… वो मेरी तरफ बढ़कर मेरे पास आकर बैठ गया।
मै: आज मौसम कितना सुहाना है।
अमनदीप: हाँ है। लेकिन इस मौसम में अपनी गर्लफ्रेंड हो तो बात ही कुछ और होती।
मै: गर्लफ्रेंड होती तो क्या कर लेते तुम??
अमनदीप: बहुत कुछ कर सकता था।
मै: पहले बताओ तो तुम्हारी गर्लफ्रेंड होती तो क्या करते?
अमनदीप: पहले मैं उसे चिपका लेता। उसके बाद उसके माथे से होकर होंठो पर किस करता और धीरे धीरे इसके साथ सब कुछ करता।
वो मेरे से खुलकर बात कर रहा था। उसे पता था मैं कर भी क्या सकती हूँ। वैसे भी मेरी नजरे उससे चुदने को साफ़ साफ़ जाया कर रही थी। अब वो जो चाहे मेरे साथ कर सकता था। अमनदीप ने मेरे को बातो के जाल में फ़साना शुरू किया। मैने भी फसने का नाटक किया। मेरे को उसके लंड को छूने की तड़प होने लगी। मै अमन के करीब जाकर उससे चिपकते हुए कहने लगी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम

मै: मेरे को भी इस मौसम का मजा लेना है। मेरे को नही पता है कि गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड को इस मौसम में कैसा मजा आता है।
अमनदीप ने मेरे को टच करते हुए कहने लगा।
अमनदीप: तुम मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ फिर मैं तुम्हे उस आनंद का अनुभव कराऊंगा।
मै: यहां कोई आ गया तो क्या होगा।
वैसे उस रास्ते पर बहोत कम लोग ही आते थे। लेकिन क्या पता था कि कोई आयेगा भी या नहीं।

अमनदीप: कोई बात नहीं मै तुम्हे किसी दिन मौका पाकर सिखा दूंगा।
मै: ठीक है! लेकिन कब सिखाओगे।
उसने मेरे को किस किया और मजा लेने लगा। मेरे गोरे चिकने बदन को सहलाते हुए वो बहोत ही उत्तेजित कर रहा था। खुद को किसी तरह से रोक रखी थी। मै भी उसके लंड ओआ अपना हाथ रखकर दबा रही थी। हम लोगों ने उस दिन सेक्स न करके बहोत ही अच्छा किया।
अचानक से मेरे दादा जी उधर से गुजरे। मेरे को वो देखते उससे पहले हम एक दूसरे से अलग हो गए थे।

दूसरे दिन उसके घर पर मेरे को कुछ सामान मांगने जाना पडा। मेरी मम्मी ने मेरे को खुद ही भेजी थी। मैं उसके घर पर आई तो मेरे को अमनदीप के अलावा कोई दिखा भी नही। उसके घर के सारे लोग कही गए हुए थे। वो मेरे को देखते ही खुश होकर मेरे से लिपट गया। मेरे को अपने बरामदे से बुलाकार अपने मम्मी के बेडरूम में ले गया। उसके बाद बिना कुछ सोचे समझे मेरे को बिस्तर पर पटकते हुए मेरे को किस करने लगा। आज वो किसी बन्दर से कम नहीं लग रहा था। मेरे को नोच नोच कर सता रहा था। मेरी गुलाब जैसे होंठो को चूस चूस कर सारा रस निचोड़ रहा था। मेरी रसभरी भरी होंठ का रसपान करके उसे काट काट कर मेरे को गर्म कर रहा था। मैं गर्म होने लगी। वो मेरे होंठो को काट कर मेरी सिसकारियां छुड़वाने लगा। मै हांफती हुईं“…..ही ही ही……अ अ अ अ उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की आवाज निकालने लगी। हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम मैने उस दिन ब्लू कलर की सलवार समीज पहने हुई थी। अमनदीप मेरे हाथों को उठाकर उसने मेरी समीज निकाल दी। अब मैं उसके सामने ब्रा में बिस्तर पर बैठी थी। मेरे दोनों गोरे गोरे दूध को देख कर पागल की उन पर झपट पड़ा। जल्दी से दोनो हाथो में लेकर जोर जोर से दबाने लगा। मेरी ब्रा को निकाल कर उसने। निप्पल से खेलना शुरू कर दिया। एक निप्पल को मुह में भर कर दूसरे को पकड़ कर खीच रहा था। जोर जोर से मेरे दूध को पीकर चुप… चुप.. चुप… चुप..की आवाजे निकाल रहा था। मै भी चुदाई करने को बहोत बेकरार हो गयी। इतने में अमनदीप ने अपना बेल्ट खोलकर पैंट को निकाला। उसका लंड अंडरबीयर में फूला हुआ दिख रहा था। अंडरबियर को निकालते ही उसका लंड खड़ा हुआ दिखाई देने लगा। उसके लंड के नीचे की दोनों गोलियां लटक रही थी। उसने अपने लंड को पकड़कर हिलाना शुरू किया। उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा। दोनों गोलियां भी हवा में लहराने लगी। मेरे को उसके लंड छूकर ब्लू फिल्मो की तरह चूसने का मन करने लगा। मैंने डरते हुए उसके लंड को पकड़कर अपने होठ से टच कराते हुए चूसने लगी। मेरी चूत की खुजली बढ़ती जा रही थीं। उसके लंड को जोर जोर से चूसने लगी। उसका लंड टाइट हो गया। लेकिन मेरे तेज लंड चुसाई ने उसका माल निकलवा दिया। मेरे को उसका माल कुछ नमकीन सा लगा। मैंने सारा माल पी लिया। कुछ देर तक तो वो शांत बैठा रहा।

फिर उसने मेरे सलवार का नाडा खोलने लगा। सलवार को निकालकर मेरे को पैंटी में कर दिया। मै पैंटी में ही बिस्तर पर लेट गयी। उसने मेरी पैंटी पर हाथ लगा दिया। मेरी चूत को मलते हुए मेरे को जोश दिलाने लगा। उसका मौसम फिर बार बनने लगा। वो मेरी चूत को मसल मसल कर गरम कर रहा था। पैंटी को निकालकर उसने अपना मुह डायरेक्ट मेरी चूत पर लगा दिया। दोनों हाथों से मेरी टांगो को फैलाये हुए मेरी चूत चटाई कर रहा था। मै सुसुक सुसुक कर “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज छोड़ रही थी। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया। मेरी चूत के दाने को काट काट कर मेरी गांड उठवा रहा था। मै भी गांड उठवा उठवा कर मजे लेकर अपनी चूत पिला रही थी। मेरी चूत को लगभग उसने 10 मिनट तक चूसा।
मै: जल्दी करो नहीं तो घर पर मम्मी बोलेंगी!!
अमनदीप: कर रहा हूँ मेरी जान!

इतना कहकर उसने अपना लंड मेरी चूत में बार बार अपना लंड रगड़ने लगा। उसका टोपा मेरी चूत पर रगड़ रगड़ कर फूल गया। उसने अपने टाइट लंड को मेरी चूत के छेद पर लगा दिया। मेरी टाइट चूत में उसका टाइट लंड घुस ही नही रहा था। बहोत परेशान होकर किसी तरह से उसने अपने लंड का टोपा अंदर घुसा दिया। मेरी तो जान ही निकाल दी। मै जोर जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” चिल्लाने लगी। उसने धक्के पर धक्का मार कर अपना पूरा लंड मेरी चूत में समाहित कर दिया। उसके बाद उसने जोर जोर से चुदाई करनी शुरू कर दी। उसका लंड मेरी चूत में जल्दी जल्दी अंदर बाहर होने लगा। मेरी चूत फट गयी। मेरे को बहोत दर्द हो रहा था। मेरी टांगो को उठाये हुए वो मेरी चूत को अच्छे से फाड़ रहा था। मेरी चीखने की आवाज को बंद करने के लिये अपना होंठ मेरी होंठ से सटा दिया। अपनी कमर को उठा उठा कर मेरी चूत में गपा गप पेल रहा था। 

मेरी होंठ चुसाई के साथ मेरी चुदाई कर रहा था। मैं अपनी चूत पर उंगलियों से मसाज करके जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई…अई…अई…..” की आवाज निकाल रही थी। कुछ ही देर बाद मेरी फटी चूत का दर्द आराम हो गया। मै भी अब जोर जोर से चोदो! और चोदो! फाड़ डालो मेरी चूत! की आवाज निकाल कर उसे तेज चोदने को उत्तेजित कर रही थी। वो मशीन की तरह खच खच खच खच मेरी चूत को चोद रहा था। कुछ देर तक मुझे ऐसे चोदने के बाद उसने मेरे को उठा लिया। शरीर से तो हट्टा कट्ठा था। मेरे को उसने अपने गोद में ले लिया। मेरी चूत में अपना लंड घुसाकर मेरे को चोदने लगा। मै उसका गला पकड़ कर चुदवा रही थी। मेरे को हवा में उछाल कर चोद रहा था। मेरे को उछल के चुदवाने में बड़ा मजा आ रहा था।

वो जोर जोर से मेरे को उछाल कर चोद रहा था। उसका लंड भी बहोत अच्छे से सेट था। मेरे दूध उसके मुह के सामने लटक रहे थे। मेरे दूध को पीकर वो मेरी चुदाई करने लगा। अचानक उसके चोदने की स्पीड बढ़ने लगी। मेरी चूत में अपना लंड वो जोर जोर से पेल कर मेरी “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की चीख निकलवा दी। उसके लंड का रगड़ मेरी चूत बर्दाश्त न कर सकी। मै झड़ गयी। अमनदीप भी झड़ने की स्थिति में पहुच गया। वो और जोर जोर से चोदने लगा। आख़िरकार वो मेरी चूत में झड़ ही गया। मेरी चूत से उसने अपना लंड निकाल लिया। हम दोनो का माल मिक्स होकर झर् झर करके नीचे गिरने लगा। मैंने चूत को साफ़ करके उसका लंड भी साफ़ किया। सारा माल उसके चादर पर बिखरा हुआ था। उसने चादर को साफ़ किया। मै अपने घर चली आई। आज भी वी जब घर आता है तो मेरे को चुदाई का सुख जरूर देता है। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज bukovsky2008.ru पर पढ़ते रहना. आप स्टोरी को शेयर भी करना.

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