दोस्त की माँ का सेक्सी क्लीवेज


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ये कहानी आज से करीब 7 साल पहले की हैं जब मैं 12 वी कक्षा में पढ़ाई करता था. मेरा नाम अमित हैं और मैं अभी एक डॉक्टर बन चूका हूँ. मैं इंदौर से हूँ और मेरी बॉडी काफी अच्छी हैं. मैं रेग्युलर जिम में जाता हूँ अपने आप को चुस्त और स्फुर्तिला रखने के लिए. मेरे लंड का साइज़ डिसेंट हैं और लम्बाई और चौड़ाई में इतना हैं की किसी भी फिमेल को संतोष दे सके.

मेरे बोर्ड के एग्जाम चल रहे थे. मेरा एक दोस्त हैं जो मेरे घर से एक मिनिट के वाल्किंग डिस्टेंस पर ही रहता हैं. और उसकी मम्मी हमें हिंदी की पढाई में हेल्प करती थी. मेरी हिंदी व्याकरण थोड़ी कमजोर थी.

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मैं उसे दीपा आंटी कह के बुलाता था. वो कलर में एकदम साफ हैं और उसकी उम्र करीब 40 साल के पास हैं. उसके बूब्स बड़े ही सेक्सी हैं और मैंने ऐसे बूब्स अपनी लाइफ में कभी नहीं देखे थे. आंटी का फिगर 36 34 38 हैं. उसकी गांड जब वो चलती हैं तो एकदम इधर उधर होती हैं. और किसी की भी नजर उसके ऊपर से हट नहीं सकती हैं.

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आंटी हमेशा ही सलवार स्यूट पहनती थी और उसका क्लीवेज बहार ही दीखता था. पहले पहले मैं वो सब इग्नोर करता था क्यूंकि एक तो वो मेरे दोस्त की माँ थी. और ऊपर से वो मुझे पढ़ाती भी थी. मेरा दोस्त मुझे मम्मी का क्लीवेज देखते हुए क्या सोचेगा वो भी डर था मेरे दिमाग में. मैं अपनी दोस्ती के उपर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. लेकिन अक्सर आंटी के क्लीवेज को देखने के बाद मुझे घर पर जा के मुठ मारनी पड़ती थी. मैं आंटी को अलग अलग पोस में चोदने की फेंटसी में लंड को हिलाता था. मैंने कभी भी नहीं सोचा था की आंटी के साथ सेक्स करने का मेरा ये सपना कभी सच होगा.

एक दिन मैं दोपहर को 3 बजे उनके घर पर गया. मैंने आंटी को ग्रिट किआ और मैंने देखा की आज आंटी की बूब्स की गली कुछ ज्यादा ही शो ऑफ़ हो रही थी. जैसे वो मुझे चुदाई के लिए उकसा रही थी. उसने उस वक्त पिंक कलर का स्यूट पहना था दुपट्टे वाला. और बूब्स की गली एकदम साफ़ साफ़ दिख रही थी. मैं अपनी आँखों को आंटी के बूब्स के ऊपर से हटा ही नहीं पा रहा था. मैंने आंटी को कहा. निलय कहा हैं? आंटी ने कहा निलय अपनी चाची के घर पर गया हैं. वहां कुछ काम हैं इसलिए वो शाम को ही लौटेगा.

आंटी ने कहा घबराओ नहीं मैं तुम्हे अकेले को पढ़ा देती हूँ. आंटी ने जब ये कहा तो उसके चहरे के ऊपर एक नोटी स्माइल थी. मैं आंटी के कहने के बाद सोफे के ऊपर जा के बैठ गया. आंटी आज तो मेरे पास ही आके बैठ गई. वो ऐसे पास कभी भी नहीं बैठती थी. वो मेरे पास इतनी नजदीक बैठी हुई थी की उसके हाथ मेरे को छू रहे थे और मेरे बदन में जैसे करंट लग रहा था.

मेरा लंड तो एकदम से कडक और लम्बा हो चूका था. और मेरे लोअर के ऊपर उसका शेप एकदम साफ़ दिख रहा था. करीब 10 मिनिट के बाद मैंने आंटी के पास पानी माँगा. आंटी जब मुझे पानी का ग्लास देने के लिए झुकी तो मेरी नजर आंटी के बूब्स की गली में जा के अटक गई. मैं सोच रहा था की उन्हें पकड के मसल दू और अपनी जबान से बूब्स को चाट जाऊं.

आंटी को ऐसे बेशुध्ध हो के देख ही रहा था की आंटी ने कहा, क्या देख रहे हो अमित?

मेरे पास आंटी को जवाब देने के लिए कोई शब्द नहीं थे. मैंने कहा कुछ नहीं आंटी.

आंटी कुछ सोचने लगी. वो कुछ बोली नहीं और फिर से मुझे पढ़ाने लगी जैसे की कुछ हुआ ही न हो.

मैं बहुत प्रयत्न कर रहा था की मैं आंटी के बूब्स को ना देखूं. अचानक आंटी मेरी तरफ ऐसे मुड़ी की मेरा राईट हेंड उसके लेफ्ट बूब को टच हो गया. और मेरा लंड और भी जोर से हुंकार उठा. मेरे लोअर में लंड का टेंट बना हुआ था.

मैं कुछ भी नहीं बोला और ऐसे एक्टिंग कर रहा था जैसे मेरा ध्यान पढ़ाई में ही था. मैं एक एक सेकंड को एन्जॉय कर रहा था. मैंने धीरे से अपने हाथ को आंटी के बूब्स की तरफ और आगे कर दिया. और मैं धीरे से हाथ को आगे पीछे भी कर रहा था. और आंटी भी मेरे और करीब बढ़ने लगी थी. और आंटी ने अब मुझे देख के कहा, अब और कितना तडपायेगा मुझे अमित, मुझे पता हैं की तू रोज मुझे देखता हैं. आज तो मेरे से भी रहा नहीं जा रहा हैं अमित.

और ये सुन के मैं भी पागल सा हो गया.

मैंने कहा, आंटी आज का दिन आप कभी नहीं भूल पाओगे.

और ये कह के मैंने आंटी के कान के निचे के हिस्से को किस करने लगा. हम दोनों एक दुसरे को 12-15 मिनिट तक मस्त किस करते रहे. और फिर आंटी ने मेरी टी शर्ट को ऊपर किया. मैं आंटी की सलवार को खोले बिना ही उसकी चूत के साथ खेलने लगा. मेरा ध्यान ही नहीं रहा की मैंने उसकी सलवार को भी फाड़ दिया था. लेकिन उसने भी बोधर नहीं किया. हम दोनों सेक्स के नशे में ऐसे खोये हुए थे की हम दोनों को जैसे कोई होश ही नहीं था.

मैंने आंटी की ब्रा खोल दी और उसके बूब्स बहार आ गए जैसे अभी तक वो किसी पिंजरे में बंद थे. मैंने उसका मसाज चालू कर दिया और उन्हें अपनी जबान से भी चूसने लगा. आंटी ने कहा. अरे बाद के लिए भी दूध बचा के रख, आज ही खा जाना हैं क्या पुरे के पुरे. लेकिन उसके ये शब्द मुझे रोक नहीं सकते थे. मेरा लंड एकदम कडक हो चूका था और मैं और भी कस के सक कर रहा था.

आंटी एकदम से मेरे पास आई और उसने मेरी अंडरवियर को एकदम से खिंचा, एक ही झटके में उतार दिया. और उसने मेरे 7 इंच के पेनिस को अपने कब्जे में ले लिया. वो निचे हुई और अपने मुहं में लोडा डाल के उसे अन्दर बाहर करते हुए चूसने लगी. वो चूसने की काफी अनुभवी लग रही थी. मैंने इस से पहले बहुत सब सेक्सुअल अनुभव तो नहीं लिए थे. लेकिन आज तक इतने मजे से मेरे लंड को किसी ने नहीं चूसा था.

आंटी ने मेरे पुरे लंड को मुहं में ले लिया. और वो मेरे बॉल्स को भी दबा के सहला रही थी. अब मैंने आंटी की चूत के ऊपर उंगलियाँ घुमाई. और बिना कुक कहे मैंने आंटी की चूत में दो ऊँगली डाल दी. आंटी झटके देने लगी थी. आंटी अब मेरे ऊपर चढ़ गई और बोली आज तुम मुझे पूरा पागल कर दोगे अमित. मैं उँगलियों को चूत में चलाना चालू कर दिया था. वो एकदम जोर जोर से मोअन कर रही थी, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह. आंटी से कंट्रोल नहीं हो रहा था. वो बोली, चोदो मुझे अमित, आअह्ह्ह्ह चोदो मुझे और अपनी रंडी बना लो!

मैंने आंटी को कहा आप के पास कंडोम हैं क्या? वो बोली नहीं तुम ऐसे ही डाल दो, मुझे ये सब अनुभव हैं. और ये सुनते ही मैंने आंटी को घोड़ी बना दिया और पीछे से अपने लंड को उसकी वजाइना में डाल दिया और उसे जोर जोर से चोदने लगा. हम दोनों एकदमक्रेजी हुए पड़े थे.

आंटी एकदम जोर से मोअन कर रही, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अमित जोर से अह्ह्ह्ह फ्क्कक्क्क मी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

मैंने और जोर जोर के झटके दिए और अपनी स्पीड को भी बढाता गया. आंटी भी अपने कुल्हे हिला हिला के मस्त चुदवा रही थी. 10 मिनिट तक घोड़ी वाले दाव लगाने के बाद अब मैंने आंटी को मिशनरी पोज में लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. मैं जितनी जोर से चोदता था आंटी भी उतनी ही जोर से अपनी गांड को हिलाती थी. और वो मुझे और भी जोर से चोदने को कह रही थी.

और तभी आंटी की चूत की मलाई छुट गई. वो गहरी साँसे ले रही थी. उसने अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर जोर से कस लिया. मेरा भी पानी छूटने को था. मैंने उसे पूछा तो वो बोली चूत में ही निकालो पानी को तभी तो मजा आएगा. मेरी छुट आंटी की भोसड़ी में ही हो गई. आंटी और मैं दोनों थक चुके थे इस मैराथन सेक्स के बाद. मैं उसके ऊपर ही लेट गया. मेरा लंड सिकुड़ के वीर्य से पूरा भीगा हुआ उसकी चूत से बहार आ गया.

मैं उसके बूब्स को हाथ से हला के और उसकी गांड पर प्यार से सहला के उसे आफ्टर-प्ले दे रहा था. और ऐसे करते हुए पांच मिनिट के भीतर मेरा लंड फिर से जाग गया. मेरे चिकने लंड को आंटी ने अपने दुपट्टे से साफ़ किया और उसे हिलाने लगी. और फिर उसने उसे सक भी कर लिया.

आंटी ने कहा, निलय को आने में अभी देर हैं.

मैं समझ गया की वो क्या कहना चाहती थी.

मैंने कहा, आंटी मुझे आप की गांड मारनी हैं.

वो बोली, मार ले मैंने कहा मना किया हैं तुझे.

वो ये कह के फिर से घोड़ी बन गई. मैंने अपने लंड के ऊपर थूंक लगा के उसकी नौक को रेडी कर दी आंटी की गांड में घुसाने के लिए!

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