डिवोर्सड आंटी ने लंड चूसा मेरा


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हल्लो दोस्तों मेरा नाम सेम हे और मैं पंजाब के भटिंडा का एक मस्त मौला लड़का हूँ. मेरी एज 22 साल हे और मैं पिछले कुछ समय से इस साईट के ऊपर सेक्स स्टोरी पढ़ रहा हूँ. मैंने सोचा नहीं था की मैं भी अपनी स्टोरी यहाँ भेजूंगा. पर फिर सोचा की नाम बदल के भेज ही देता हूँ ताकि मैं जिनके किस्से पढता हूँ वो भी मेरे सेक्स अनुभव के बारे में जाने.

मेरे पापा की जिद की वजह से मुझे इंजीनियरिंग ज्वाइन करनी पड़ी थी. मैंने महनत कर के पास किया और फिर एक अच्छी कम्पनी में सोफ्टवेर इंजीनियर का काम भी मिल गया मुझे. अपने काम के लिए मैं लोकल ट्रेन से कम्यूट करता था. मेरा काम के घंटे 12पीएम – 9 पीएम थे. पिछले कुछ महीनो से मेरा यही रूटीन रहा था. नया था इसलिए काम की जगह पर सब पेलते थे मुझे अपना काम करवा करवा के. और इसी वजह से मैं स्ट्रेस में जीने लगा था.

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एक दिन मैं 11 बजे के करीब अपनी ट्रेन के लिए वेट कर रहा था. तब मैंने एक औरत को देखा जो करीब 30-35 साल की थी. वो भी ट्रेन पकड़ने के लिए ही खड़ी थी. उसके हाथ में एक हेंडबेग थे और कंधे के ऊपर लेपटोप का बेग भी था. तब उसे देख के मुझे पता नहीं था की यही औरत मेरी स्ट्रेसफुल लाइफ में खुशियों का समा बांधेगी. आंटी के बारे में बता दूँ आप को. उसका नाम संजना था. उम्र तो आप को बताई ही मैंने. बाल सीधे थे या उसने सीधे करवाए होंगे पार्लर में.

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वो एक बड़े फर्म में आईटी मेनेजर थी. उसका फिगर 36-28-34 था और हाईट में वो करीब 6 फिट जितनी थी. उसके बूब्स बड़े थे और गांड तो बूब्स से भी अधिक बड़ी थी. उसके ये दोनों सेक्सी अंग सच में देखने लायक थे. चलिए वापस स्टोरी पर.

तो मैं, आंटी और कुछ और लोग ट्रेन के आने की वेट में थे. लेकिन ट्रेन उस दिन आ ही नहीं रही थी. टाइम पास करने के लिए मैं म्यूजिक सुन रहा था. और साथ ही में मैं अपने मोबाइल के ऊपर फेसबुक भी ब्राउज कर रहा था. तभी मैंने देखा की वो आंटी मेरी तरफ को बढ़ी.

पहले तो मैंने उसे इग्नोर किया और अपनी मोबाइल की स्क्रीन को ही देखने लगा. मैंने तिरछी नजर से देखा तो वो मेरी तरफ ही आ रही थी. फिर उसने कुछ कहा लेकिन हेडफोन की वजह से मैंने सुना नहीं. मैंने उसे देख के हेडफोन हटाये और उसने कहा, आज लोकल ट्रेन में कुछ काम चल रहा हे क्या?

मैं: सोरी, आई हेव नो आइडिया.

आंटी: ओह, ओके.

और फिर वो एकदम कंफ्यूज से लुक के साथ ही ट्रेन की वेट करने लगी. वो मेरे पास ही खड़ी हुई थी और उसके बदन से लेडी परफ्यूम की मस्त स्मेल आ रही थी. उसकी हाजरी से मैं भी थोडा आतुर सा हो गया था. मैं सोच ही रहा था की कैसे भी कर के आइस ब्रेक करूँ और इस आंटी से बात कर लूँ! लेकिन मेरे पहले वो बोल पड़ी.

आंटी: तुम कब से खड़े हो यहाँ पर?

मैं: मुझे आधा घंटा हो गया.

आंटी: मैं भी 20 मिनिट से आई हूँ.

मैं: हम्म्म.

वो आतुर हो के इधर उधर चलने लगी थी.

मैं: सब ठीक तो हे ना?

आंटी: हाँ, ये कह के उसने स्माइल दे दी.

और फिर ट्रेन 10-11 मिनिट के बाद आ ही गई. मैं जनरल और वो लेडिज कम्पार्टमेंट में चढ़ गई.

दुसरे दिन सुबह मैंने उसे फिर से देखा. हमारी नजरें मिली और उसने मुहे स्माइल दे दी. मैंने भी उसे स्माइल दी. और फिर ये कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता गया.

अगले हफ्ते मैं अपने काम फिनिश करने के बाद स्टेशन पर अपने घर जाने के लिए ट्रेन की वेट कर रहा था. रात के करीब 10 बजे थे. और संजना आंटी वहां आ गई. वो मेरे पास आ के खड़ी हुई और बातें करने लगी. उस दिन पहली बार हम दोनों का इंट्रो हुआ. फिर काम वगेरह की बाते हुई और हम दोनों एक दुसरे के साथ कम्फ़र्टेबल हो गए.

वो मुझे मेरे नाम से और मैं उसे मेम कह के बुलाता था. दिन निकले और हम दोनों और भी क्लोस हो गए. हमने नम्बर भी दे दिए थे एक दुसरे को. वो भी अब जनरल कम्पार्टमेंट में ट्रेवल करने लगी थी मेरे साथ ही. ऐसे ही 2 महीने बीत गए. हम अच्छे दोस्त बन गए, उम्र के डिफ़रेंस के बावजूद भी. इन दो महीनो में कभी भी उसने अपने निजी जीवन ककी बात नहीं की थी. मैंने हालांकि उसे सब कुछ कहा था लेकिन उसने अपनी पर्सनल लाइफ को छिपा के ही रखा था जैसे.

एक दिन रात को करीब 1 बजे मुझे उसका टेक्स्ट आया. मुझे अजीबी लगा क्यूंकि वो रात को 11 बजे के बाद कभी कोई कम्युनिकेशन नहीं करती थी. मैंने वापस रिप्लाय किया की अभी तक जाग रही हो आप? उसने स्माइली के साथ जवाब दिया की अकेली फिल कर रही थी इसलिए नींद ही नहीं आई मुझे. मैंने पूछा आप के हसबंड और बच्चे नहीं हे? उसने जवाब दिया की मेरा कब से डिवोर्स हो चूका हे और बच्चे कभी थे ही नहीं. मैंने उसे सोरी कहा और उसने कहा इट्स ओके.

उस दिन हमने सुबह 3 बजे तक बातें की. फिर मैंने उसे कहा की अब सो जाओ आप मोर्निंग में ट्रेन छुट जायेगी नहीं तो. उस रात के बाद वो अपनी पर्सनल लाइफ को ले के थोडा खुली थी मेरे साथ. उसने मुझे बताया की वो अपने एक कजिन के साथ अपार्टमेंट शेयर कर के रहती हे. और वो वीकेंड में अपने विलेज चली जाती हे.

और फिर ऐसे करते करते उसका बर्थ डे आ गया. वैसे मुझे पता नहीं था लेकिन काम से वापस आते हुए उसने ही बताया की आज मेरा जन्मदिन हे. मैंने कहा सोरी मुझे पता नहीं था. उसने कहा मैंने कभी बताया ही नहीं था फिर भला तुम्हे कैसे पता होता. उसका स्टॉप मेरे से पहले आता था. वो उतरी और मुझे वेव कर के बाय बोलने लगी. मैंने उसे कहा हेप्पी बर्थ डे. वो हंस पड़ी.

रात को हम दोनों टेक्स्ट में चेटिंग करने लगे. मैंने उसे कहा की बर्थ डे ट्रीट में क्या मिलेगा मुझे? वो बोली तुम्हे क्या चाहिए तो बोलो. मैंने कहा कही बहार खाना खिलाओ. उसने हंस के कहा, एक डिवोर्स लेडी से डेट के लिए नहीं पूछते हे!

मैंने कहा, मुझे कोई परवाह नहीं हे आप डेट कहो तो डेट सही लेकिन मैं आप के साथ डिनर करूँगा.

वो भी डिनर के लिए मान गई.

उसके घर के करीब में ही एक रेस्टोरेंट पर हम दुसरे दिन डिनर के लिए चले गए. डिनर के बाद वो मुझे अपने अपार्टमेंट पर ले गई. मुझे लगा की वो मुझे अपनी कजिन से मिलवाएगी. लेकिन वहां पर कोई भी नहीं था. उसने कहा की मेरी कजिन सिक हे इसलिए हफ्ते भर के लिए नेटिव प्लेस में गई हुई हे. हम दोनों पलंग में बैठ के बातें करने लगे. समय का तो जैसे पता ही नहीं था. रात के करीब 12 बज गए थे तो उसने कहा की रात को यही पर रुक जाओ आज तुम. मैंने कहा नहीं मैं ओला ले लूँगा.

वो थोड़ी दुखी हुई. मैंने देखा तो अगले 30 मिनिट तक कोई ओला नहीं थी. उसने कहा अब रुक भी जाओ यहाँ अपर मैं थोड़ी खा जाउंगी तुम्हे.

मैंने अपने रूम मेट्स को कॉल कर दिया की मैं नहीं आ रहा हूँ. वो अपना ड्रेस चेंज कर के नाईट स्यूट में आ गई. उसने एक लूज पेंट और फूलो वाला शर्ट पहना हुआ था. उसका 2 बीएचके अपार्टमेंट था. एक बेडरूम में बेड था और दुसरे बेडरूम को वो लोगों ने ऑफिस का सेटअप किया हुआ था. उसने कहा तुम मेरे बेडरूम में सो जाओ मैं सोफे के ऊपर ही सो जाउंगी. मैंने कहा नहीं मैंने सोफे पर सो जाऊँगा आप बेडरूम में जाओ. उसने बहुत कहा लेकिन मैं नहीं माना. वो अपने कमरे में गई. मैं लेट सोने का आदि हूँ इसलिए मैंने सोंग लगाए और सुनने लगा.

कुछ देर में मुझे नींद आ गई. फिर मैं जाग गया संजना की आवाज से ही. मैंने मोबाइल में देखा तो 3 बजे थे, मैंने उसे कहा क्या हुआ? उसने कहा सोरी मैंने तुम्हारी नींद डिस्टर्ब की लेकिन मुझे आज नींद ही नहीं आ रही हे. मैं सोच ही रहा था की क्या कहूँ उसे और वो मेरे पास बैठ गई. वो टेन्स सी दिख रही थी.

संजना आंटी: तुमसे एक बात कहूँ?

मैं: हां मेम बोलो ना.

संजना आंटी: क्या मैं तुम्हारे पेनिस को पकड़ सकती हूँ?

मैं उसके इस प्रश्न से जैसे पथ्थर सा हो गया. वो मुझे सीधे आँखों में देखने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी. मैं उतना क्लियर नहीं था तो मैंने उसे पूछा क्या?

उसने मेरी तरफ आँखों को मिला के देखा और बोली, मैं तुम्हारा लंड चुसना चाहती हूँ! मुझे डिवोर्स लिए सैलून हो गए हे. आई एम सोरी मैं जानती हूँ ये गलत हे लेकिन मैं आज खुद पर कंट्रोल ही नहीं कर पा रही हूँ.

मेरा तो खड़ा हो चूका था और पता नहीं चल रहा था की उसे क्या जवाब दूँ. वो बोली सोरी और जाने के लिए खड़ी हुई.

मैंने उसे आवाज दी लेकिन वो रोते हुए अपने कमरे की तरफ भागी. मैं भी उसके पीछे गया. वो अपने बिस्तर में थी, लाईट बंद थी और वो अपने दोनों हाथ को मुहं पर रख के रो रही थी. मैं उसके पास गया और उसे कंसोल करने लगा. वो रो रही थी और मेरा लंड पेंट के अन्दर विचलित सा हुआ पड़ा था.

मैंने अपने लंड को बहार निकाला और उसके चहरे के सामने रख दिया. मैंने उसे आवाज दी की मेम मेरे सामने देखो. लेकिन उसने हाथ नहीं हटाये. तो मैं उसके पास गया और अपने लंड को उसके मुहं के ऊपर रख के होंठो को टच करवा दिया. उसने आँखे खोली और मुझे नंगा देखा और मेरे खड़े हुए लंड को भी देखा.

और उसने एक ही सेकंड में लंड की कुल्फी को अपने मुहं में भर ली. और वो जैसे बहुत सालों से भूखी हो वैसे मेरे लंड को मजे से चूसने लगी. और वो निचे हाथ कर के मेरे बॉल्स को भी दबा रही थी. मेरे बदन में जैसे करंट की लहर दौड़ पड़ी. वो मेरे बॉल्स को दबा रही थी तो मुझे पेन हो रहा था. लेकिन उसका ब्लोवजोब इतना हॉट था की मजा भी उतना ही आ रहा था. उसका मुहं थूंक से भर गया था. फिर उसने मेरे लंड को बहार निकाल के अपने गालों के ऊपर थप्पड़ मरवाने लगी मेरे खड़े लंड से. और फिर वो मेरे बॉल्स को मुहं में डाल के चूसने लगी.

इस डिवोर्सड आंटी ने मेरे लंड और बॉल्स में पेन करवा दिया था. मैंने उसके बाल पकड़ लिए और उसके मुहं को चोदने लगा. वो अपने हाथ से मेरे लंड को मार रही थी. फिर उसने लंड को वापस अपने मुहं में भर लिया और चूसने लगी. मेरा लंड दुःख रहा था. और पांच मिनिट के अन्दर ही मेरे लंड से ढेर सारा माल निकल गया जो वो सब का सब पी गई.

वो वीर्य खा के बोली, थेंक्स.

मैंने कहा, मेम ये तो बस स्टार्टिंग थी, आप को जो चाहिए था वो मैंने दिया. अब मैं जो लेना चाहता हूँ वो आप दे दीजिये.

वो समझ गई और खड़ी हो के उसने अपनी लूज पेंट को खोल दी. मैंने अपने हाथ से उसके शर्ट को खोला. वो अपनी पेंटी निकाल के बिस्तर में फुल न्यूड लेट गई. मैंने भी खड़े हो के अपने खोले और उसके साथ लेट गया. सुबह तक मैंने चोद चोद के उसकी चूत को लाल कर दी थी. मेरा लंड भी सूज सा गया था.

अक्सर संजना आंटी वीकेंड में अपने नेटिव नहीं जाती हे अब. उसकी कजिन के जाने के बाद मैं सेटरडे नाईट से आंटी के साथ होता हूँ. मंडे मोर्निंग तक हम दोनों हसबंड वाइफ की तरह ही रहते हे.

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