न तड़पाओ मेरे राजा अपना मोटा लंड डाल दो मेरी चूत में


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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अभिनंन्दन मिश्रा है। मै झाँसी का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 48 साल है। आज भी मेरे लंड में तनिक भी ढीलापन नहीं आया है। लोहे की रॉड की तरह आज भी मेरा लंड सख्त होकर खडा हो जाता है। अब तक मैं कई सारी लड़कियों, औरतों, भाभियों को चोद चुका हूँ। मेरी 35 साल की उम्र में दो शादी हो चुकी थी। मेरी पहली बीबी बहोत ही लजवाब थी। लेकिन दूसरी उतनी ही बेकार थीं। फिर भी हाथ से काम चलाने से तो अच्छा ही था।

लेकिन शायद ईश्वर को ये भी मंजूर नहीं था। मेरी दूसरी बीबी भी भरी जवानी में चल बसी। मै भी जवानी के आलम मे कुँवारे लड़को की तरह तड़प रहा था। फिर से मै अपने 7 इंच के लंड को हिला हिला कर काम चला रहा था। मेरे को जल्दी से जल्दी अपनी हवस को शांत करने के लिए चूत का इंतजाम करना था। अक्सर बाजार में जाते समय रास्ते में दूसरे की बीबियों को ताड़ते हुए जाता था। गोरी गोरी औरतों को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। एक दिन मेरे को रास्ते में खड़ी एक औरत दिखी। मैने उसे देखा तो देखता ही रह गया। बाइक पर बैठे बैठे उसे ताड़ रहा था। उससे मेरी नजर हट ही नहीं रही थी। आज तक मैंने वैसी माल नहीं देखी थीं। उसकी फिट बॉडी देखकर मेरे को मेरी पहली बीबी की याद आ गयी।

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उसका गोल गोल चेहरा, भूरी आँखे और सुनहले बालो को देखकर मैं अपना सुध बुध खो बैठा। मेरे दिल और दिमाग में बस उसी का चेहरा बैठ गया। हर दिन मैं उस रास्ते के कई बार चक्कर काटने लगा। उसके पड़ोस में मेरा एक दोस्त रहता था। मै उसी के घर जाकर घंटो तक उसे ताड़ता रहता था। लेकिन ये बात उसे पता नहीं थीं। मेरे को उसकी चूत चोदने का अवसर तो सर्दी के मौसम ने प्रदान किया। ठंडियो का मौसम था। उस दिन धूप निकली हुई थी। मै अपने दोस्त के घर गया हुआ था। धूप निकलते ही वो मेरे को छत पर बैठ कर बात करने को कहने लगा। फ्रेंड्स मेरे दोस्त का घर दो मंजिल का था और उस औरत का घर एक मंजिल का था। जिससे मेरे को उसके छत पर होने वाला हर एक कार्यक्रम आसानी से दिख जाता था। मेरा दोस्त भी उसके पीछे हाथ धो के पड़ा था। लेकिन ईश्वर ने उसे चोदने का मौका मेरे को ही दिया। कुछ देर छत पर बैठा इन्तजार करता रहा।

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मेरे दोस्त ने उसका नाम काजल बताया था। नाम की तरह वो भी बड़ी प्यारी थी। उसके हसबैंड उसे छोड़कर कही बाहर काम पर रहते थे। इतनी खूबसूरत बीबी को भला कोई कैसे छोड़ के रह सकता है….. ये मै अपने मन में सोच रहा था। दीवार को पकड़कर उसकी छत की तरफ देख रहा था। उस दिन उसने काले रंग की साडी ब्लाउज पहने हुए छत पर लगे दरवाजे से छत पर प्रवेश की। उसका गोरा बदन धूप में चमक रहा था। उसकी मटकती बलखाती कमर देखकर लंड में करेंट सा लग गया। काजल के जवान खूबसूरत बदन से जैसे रस टपक रहा हो, हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम मेरे को उसने छत से देखते हुए देख लिया। ईश्वर ने अजीब करिश्मा किया। वो भी मेरे को देखने लगी। मैने इशारों में उसे इजहार किया। वो सब समझ गयी। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा। एक दिन मैंने बाइक अपने दोस्त के घर खड़ी करके बहोत ही हिम्मत की और उसके घर का बेल बजाया। अंदर से एक छोटा लड़का निकल कर मम्मी…. मम्मी…. चिल्लाते हुए दरवाजा खोला। तभी पीछे से काजल भी आ गयी। उसने उस 5 साल के लड़के को अंदर भेज कर मेरे को घर में बुलाकर बात करने लगी। गेट को तुरंत ही बन्द कर दिया। उस छोटे से क्यूट बच्चे का नाम लकी था।

लकी: मम्मी ये कौन है??
काजल: ये अपने दूर के रिश्तेदार हैं। जाओ इनके लिए पानी लेकर आओ!

मै मन ही मन उसके गदराए हुए बदन को चूमने के सपने देख रहा था। लकी कुछ देर में एक गिलास में पानी लेकर फिर से आ गया। काजल ने उसे टी.बी में कार्टून मूवी लगाकर देखने को कहने लगी। उसके यहां बरामदे में ही टी.बी लगी हुई थी। उसके बाद वो मेरे को अपने साथ लेकर अंदर अपने रूम में ले गयी।

काजल: अब हम लोग यहाँ आराम से बात कर सकते हैं
मै: काजल जी यू आर लुकिंग सो हॉट…. देखने में तो लगता ही नहीं की आपका कोई बच्चा होगा
काजल: झूठी तारीफे करना मर्दो की आदत होती है!
मै: झूठ नहीं बोल रहा सच में तुम्हारा फिगर बहोत ही लाजबाब है। तेरे को पहली बार देखते ही मैं फ़िदा हो गया था
काजल: तुम मेरे को छत पर लाइन मार कर मेरे अंदर उमड़ने वाले शोले को भड़का दिए
मै: मन तो मेरा भी कर रहा था कि अभी जाकर तुमसे लिपट जाऊं
काजल भी लंड खाने को तरस रही थी। महीने दो महीने में कही एक बार लंड खाने का मौका मिलता था। हसबैंड उसका तो बाहर ही रहता था।
काजल: किस काम के लिए तुम मेरे पास आये हो
मै: तुम जो चाहे करवा लो!

काजल मेरे से चिपक गयी। एक बार की मुलाकात में काजल का काम हो गया। वो मेरे को कस के जकड ली। मैंने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया। रबड़ जैसे मुलायम बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। मेरा ठंडा हाथ उसके जिस्म पर पड़ते ही वो मेरे को और कस के जकड ली। काजल के बदन पर तो मेरा हाथ रुक ही नहीं रहा था। जैसे उसके पूरे बदन पर तेल लगा हो। उसकी स्किन इतनी ज्यादा स्मूथ थी।

पहली बार मैंने ऐसे बदन को हाथ लगाया था। लड़कियां तो बहोत चोदी लेकिन इस तरह के बदन को छूने का मौका मेरे को पहली बार मिला था। उस दिन भी उसने साडी ब्लाउज पहनी हुई थी। लाल रंग की साडी भी बहोत जम रही थी। मेरा हाथ उसके मुलायम मक्खन से दूध पर पड़ा। मेरे हाथ रखते ही अपना शरीर काजल ऐंठने लगी। उसकी अकड़ से जाहिर था कि वो गर्म हो रही था। उसका बच्चा उधर कार्टून मूवी देख रहा था। इधर मै ब्लू फिल्म की शूटिंग कर रहा था। मैंने अपने हाथ से उसका गोरा मुखड़ा अपनी तरफ किया। उसजे चाँद से रोशन चेहरे को चूम लिया। कमल की पंखुडियो से लाल लाल होंठो पर अपना होंठ टिका दिया। उसके होंठो को चूस कर उसका रस पीने लगा। काजल सुसकने लगी। मेरा मौसम भी बन चुका था। मै उसके होंठो को काट काट कर पीने लगा।

वो भी अपनी साँसे तेज करती हुई मेरा साथ दे रही थी। मैंने करीब 10 मिनट तक उसके होठो को पिया। होंठो से होंठ को हटाते ही मैंने उसकी होंठो को देखा। होंठ चुसाई से वो खून की तरह लाल हो चुका था। लग रहा था कि उसने ढेर सारी लिपस्टिक लगा रखी जो। मैंने उसके गले से धीरे से साडी का पल्लू सरका कर किस किया। ब्लाउज में उभरे हुए उसके मम्मे को हाथो में लेकर दबाने लगे। ब्लाउज के ऊपर से ही कुछ देर तक उसके दूध को निचोड़ा। मैंने एक एक करके उसकी ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया। उसने अंदर काले रंग की डिज़ाइनर ब्रा पहने हुई थी। जो की आधा नेट वाली थी। आधी चूंचियां तो साफ़ साफ़ दिख रही थी। पूरे दूध के दर्शन के लिए मैने उसकी ब्रा को निकाल दिया। चमकते हुए बूब्स को देखकर मैंने चूम लिया।

अपना मुह उसके उभरे हुए निप्पल पर लगा दिया। काले रंग की निप्पल उसके गोरे मम्मे पर बहोत ही रोमांचक लग रहे थे। मैंने अपने मुह में भरकर उसे पीना शुरू किया। बच्चे की तरह उसका दूध पीने में मजा ही मजा आ रहा था। मेरे को उसने अपने दूध में चिपका लिया।

काजल: चूसो! और जोर से चूसो! काट डालो मेरे मम्मे!

मै ये सुनकर और जोर जोर से उसके मम्मे को पीने लगा। मेरा दांत भी कभी कभी उसके निप्पल में लग जाता था। वो जोर जोर से “……अई…अई….अई……अई….इस स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”, की सिसकारियां भरने लगती थी। मैं उसके दूध को निचोड़ कर लगभग 15 मिनट तक पिया।

काजल: मेरे को भी अपना लंड दिखाओ! मेरे को भी खाने के मन कर रहा है

मैंने अंडरवियर सहित पैंट को निकाल दिया। गोरे लंड को देखकर काजल के भी मुह में पानी आ गया। वो जल्दी से मेरे लंड को सहलाते हुए अपने मुह में भर ली। मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मेरा लंड भी अकड़ते हुए खड़ा होने लगा। मै बहोत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा। मेरे लंड की जड़ को चाट रही थी। मैने भी उसे पूरी तरह से गर्म करने के लिए उसकी साडी को उतार दिया। साडी को उतारते ही वो पेटिकोट में हो गयी। काले रंग की पेटिकोट के नाड़े को खोलकर पैंटी सहित नीचे करके निकाल दिया। बिस्तर के किनारे करके उसे चित्त लिटा दिया। मै बिस्तर से नीचे अपने घुटने को बैंड करके बैठा हुआ था। मैंने उसकी टांगो को खोला तो उसकी चौड़ी गहरी चूत का दर्शन हो गया। हिंदीपोर्न स्टोरीज डॉटकॉम मैंने उसकी गोरी लाल चूत पर अपनी जीभ लगाकर चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे बालो को पकड़कर खींचने लगी। मै फिर भी उसकी चूत में अपनी जीभ घुसाकर चुसाई करता रहा। जीभ से ही मैं उसकी चूत चोदने लगा। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की जोशीली सिसकारी निकाल रही थी। मैंने कुछ देर तक उसकी चूत को चाटकर अपना लंड लगा कर रगड़ने लगा। मेरे लंड के रगड़ को वो नहीं सह पा रही थी। बिस्तर पर अपना सर इधर उधर पटक रही थी। मेरे लंड को काजल ने अपने हाथों से पकड़कर चूत में घुसाने लगी। मेरा लंड उसकी चूत की छेद से सटा हुआ था।

काजल: और न तड़पाओ मेरे राजा अपना मोटा लंड डाल दो मेरी चूत में!
मै: थोड़ा तड़प लो मेरी जान! अभी खिलाता हूँ तुझे अपना मोटा लंड

इतना कहकर मैंने जोर का झटका लगाया। मेरा आधा लंड एक ही बार में घुस गया। रबड़ सी उसकी चूत का मुह फ़ैल गयी। वो जोर जोर से “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ की चीखे निकालने लगी। मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर तक प्रवेश कर गया। मैने अपना पूरा लंड जड़ तक घुसाकर उसकी जोर दार चुदाई करनी शुरू कर दी।

काजल : आराम से डालो! नहीं तो मेरी जान निकल जाएगी

मै अपनी धुन में मस्त था। झटकें पर झटका मार कर पूरा लंड अंदर बाहर कर रहा था। उसकी एक चीख न सुनकर मैं धकापेल पेलता रहा। दोनों टांगो को फैला कर काजल अपनी चूत चुदाई करवा रही थी। कुछ हो देर में काजल अपनी गांड उठा उठाकर मेरा साथ देने लगी। मैंने कुछ देर तक चुदाई ऐसे ही जारी रखी। उसके बाद काजल की एक टांग उठाकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। फच.. फच.. की आवाज उसकी चूत में अपना लंड डाल कर आवाज निकलवा रहा था।

काजल को भी मजा आने लगा। वो अपनी गांड आगे पीछे करके चुदवाने लगी। कमर आगे पीछे करके मैं भी चोद रहा था। 20 मिनट तक मैंने उसे घुसुक घुसुक कर चोदा। मैंने काजल को उठाया। उसी रूम में पास के टेबल के सहारे काजल को झुका दिया। मैंने उसकी टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख कर। उसकी चूत की चुदाई करनी शुरू कर दी। पूरा शरीर पसीने से तर हो गई। हल्की ठंडी में भी पसीने की बारिश हो गयी। उसकी चूंचियो को दबा दबा कर उसकी चुदाई कर रहा था। हवा में मेरे लंड की दोनों गोलियां झूल रही थी। ठक ठक उसकी गांड की छेद पर लड़ रही थीं। कुछ देर तक ही मै चुदाई कर पाया। मै झड़ने वाला हो गया था। काजल उससे पहले ही कई बार झड़ चुकी थी।

मैं उसकी चूत को फाड़ रहा था। झड़ने से पहले मेरी स्पीड एक बार फिर से बहोत तेज हो गयी। काजल के मुह से एक बार फिर से चीखें निकलने लगी। उसकी “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अ ई…अई…अई…..”की आवाज के साथ मैं चूत में ही स्खलित हो गया। काजल ने अपनी चूत से टपकता हुआ माल चाट लिया। उस दिन मौसम बनते ही दोबारा काजल की चुदाई की। काजल की चूत को चोदने का मौका हफ्ते में एक दो बार मिल ही जाता है। अब मैं उसके हसबैंड की कमी पूरा करता हूँ। वो मेरी बीबी की कमी को पूरी कर देती है।

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