रास्ते में मिले अजनबी से चुदाई


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हाय फ्रेंड्स मेरा नाम सारिका है। मैं मुम्बई की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 29 साल है। मेरा फिगर 36,32,34, मेरे को स्लिम बॉडी चाहिए थी। जिसके लिए रोज मेरे को जॉगिंग पर सुबह सुबह जाना होता था। मै रोज मॉर्निंग में उठकर जॉगिंग पर जाती थी। हर दिन कुछ नए लोग मिल जाते थे। मै भी काफी हॉट माल लगती थी। मेरे पीछे काफी लोग लाइन में लग जाते थे। मेरे को बहोत अच्छा लगता था। मेरे हसबैंड ट्रांसपोर्ट का काम करते थे। जिससे वो हफ़्तो बाहर ही रहते थे। कभी कभी तो इससे भी ज्यादा हो जाता था। मैं बहोत ही ज़्यादा कामुक बदन वाली थी। मेरे को इस उम्र में लंड की बहोत ही प्यास रहती थी।

मै सारा दिन घर पर अकेले ही रहती थी। मेरा टाइम पास टी.बी देखकर ही होता था। मेरे को एक लंड की तलाश हो गयी। जिसे मेरी चूत रोज खा सके। मेरे घर में मेरे अलावा मेरी बूढी सास भी रहती थी। वो भी अक्सर छोटे चाचा के घर पर चली जाय करतीं थी। मेरे को बहोत ही बोरियत महसूस होती इस जिंदगी से जिसमे मैं अपनी जवानी का कुछ ममजा ही न लूट सकूं…! एक दिन मैं जॉगिंग को घर से निकली हुई थी। मेरे को एक लंबा चौडा कद काठी वाला लड़का दिखा। दूसरें मंजिल की छत से काफी देर से मेरे को ताड़ रहा था। मै भी मुड़ मुड़ कर उसे देखती हुई अपने घर चली आयी। उसका चेहरा किसी हीरो से कम स्मार्ट नहीं था। उसकी जबरदस्त पर्सनालिटी को देखकर मेरी चूत में हलचल सी हो गयी। दो तीन दिन तक तो मैं उसे खूब लाइन मारी। एक दिन उसने बाहर रोड पर ही खड़ा होकर मेरा जॉजिंग में कंपनी देने लगा। हम दोनों साथ ही धीरे धीरे चलने लगे।

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मै: नाम क्या आपका???
वो: विवेक! और आपका?
मै: सारिका
इस तरह से हम दोनों के मिलने की कहानी बन गयी। हर दिन अब हम साथ में चलते थे। मेरे को लगता था कि वो लगभग मेरी उम्र का होगा लेकिन वो तो अभी 22 साल का ही था। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा लग रहा था। तो वो मेरी उम्र का होता तो कैसा लगता! मै नई नई विवाहिता लड़की थी। सम्भोग का आनंद शादी के कुछ दिन बाद तक ही ले सकी। पतिदेव तो अपने काम धंधे में बिजी रहते थे। मेरे को भी अब टाइम पास का सामान मिल गया था।

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हम दोनों के पास एक दूसरे का कांटेक्ट नंबर था। हर दिन एक दूसरे से घंटो तक बात करने लगे। वो मेरे से धीरे धीरे खुल के बात करने लगे। एक हिसाब से समझ लो फ़ोन सेक्स सा होने लगा था। लेकिन मेरा टारगेट तो उससे चुदवाने का था। एक दिन  मेरे को उससे चुदने के बहाना मिल ही गया। हम दोनों सुबह सुबह जॉजिंग को जा रहे थे। मेरे साथ विवेक भी चलने लगा। हम लोगो का हेल्लो हाय हुआ। उसके बाद उसने मेरे से खुल के बातें करनी शुरू कर दी।

विवेक: लड़कियों को कैसे सेक्स में ज्यादा मजा आता है???
मै: ये मुह से नहीं बता सकती? खुद ही कर के देख लेना
विवेक: अगर होती कोई तो देख लेता?? मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है। तो किसके साथ करके देखूँ
मै: इतने अच्छे स्मार्ट पेर्सनालिटी के होकर भी एक गर्लफ्रेंड नहीं है!!

विवेक अपना सर हिलाते हुए ना बोलने लगा। मैं बहोत ही खुश हो गयी। मैने विवेक को मस्ती मस्ती में सब बताने लगी। बाद में मैंने पूछा कुछ समझ में आया। उसने न में अपना सर हिला दिया। विवेक का लंड मेरी हॉट सेक्सी बातों को सुनकर खड़ा हो चुका था। वो बार बार अपना हाथ अपने लंड पर रख कर दबाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन एक बार लंड को खड़ा होने के बाद झुकाना बहोत ही मुश्किल काम हो जाता है। मै उसके लंड के तरफ देखकर कहने लगी।

मै: क्या बात है विवेक अपना हाथ बार बार जिप पर क्यों रख रहे हो???

विवेक(शरमाते हुए): क्या बताऊँ सारिका! तेरे मुह से हॉट सेक्सी बाते सुनकर मेरा शस्त्र खड़ा ही गया है
मै: कोई बात नहीं तुम मेर साथ मेरे घर चलो मै सब सही कर दूँगी!

इतना सुनकर विवेक भी उछल पड़ा। मेरे साथ मेरे घर पर आ गया। उस दिन घर पर कोई नहीं था। पतिदेव हफ्ते के लिए कही बाहर गए हुए थे। सासू माँ भी चाचा के घर पर गयी हुई थी। घर पर अकेली ही मै थी। इसीलिए विवेक को अपने साथ ले आई। दिन के लगभग 8 बज रहे थे। विवेक मेरे साथ साथ ही पूरे घर में घूम रहा था। जॉजिंग के दौरान काफी पसीना निकल आया था तो मैं नहाने चली गयी। बॉथरूम में अपने मम्मे को मसल कर अपने आप को खूब गर्म किया। विवेक को भी अपने पतिदेव का तौलिया देते हुए उसे भी नहाने को कहा। वो भी बॉथरूम में फ्रेश होकर आ गया। तब तक मैंने नाश्ता तैयार कर दिया।

नाश्ता करने के बाद मैंने उससे एक बार फिर से हॉट सेक्सी बाते करनी शुरू कर दी। उसका लंड एक बार फिर से उफान मारते हुए खड़ा हो गया। वो मेरे बड़े बडे मम्मे को गहरे समीज की डिज़ाइन में देख रहा था। मैंने अपने कंधे पर दुपट्टा भी नही डाला था। जिससे उसका मौसम बना सकूं। मेरे को देखते हुए वो मुस्कुराने लगा। अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसने मेरे मम्मे को दबा दिया। वो अभी तक इस खेल में अनाड़ी लग रहा था। वो डरते हुए मेरे दूध को दबा रहा था। वो इतना डर रहा की मेरे दूध जैसे बम हो कही वो फट ना जाएँ…! कुछ देर के बाद मैं उसके साथ अपने बेडरूम में पहुच गयी। उसको बिस्तर पर धकेलते हुए उससे कहने लगी।
मै: आज सिखाती हूँ लड़कियों को सेक्स का मजा कैसे आता है

मैंने उस दिन सलवार समीज पहना हुआ था। सफ़ेद और काले रंग के कपडे में मैं बहोत ही रोमांचक लग रही थी। विवेक तो सिर्फ तौलिया और अंडरवियर ही पहना हुआ था। उसके बाल अब भी गीले गीले थे। मैं उसके ऊपर चढ़ गयी। मेरे चेहरे को ही वो देख रहा था। मैंने अपना होंठ उसके होंठो से लगा दिया। जम कर मैं उसे किस करने लगी। विवेक को कुछ पता ही नहीं था। वो अपना होंठ मजे से चुसवा रहा था। लेकिन होंठ चुसाई का ज्ञान पता नही कहाँ से कुछ ही समय में उसके अंदर आ गया। वो भूखे शेर को तरह मेरी होंठो को चूसने लगा। मै परेशान हो गयी। वो मेरी होंठ को काट काट कर चूसने लगा।

मेरी साँसे तेज हो गयी। मेरे को वो साँस लेने ताम मौक़ा नहीं दे रहा था। मेरी मुह के अंदर अपनी जीभ डालकर वो अपनी हवस को शांत करने लगा। 10 मिनट तक तो हमने ऐसा ही किया। वो मेरे होंठ को चूसते रहा मैंने भी उसका साथ दिया। मेरी मुह से कुछ आवाज ही निकल रहा था। मै सिर्फ “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”, की आवाज की सिसकारी भर रही थी। अभी तक तो मैं उसके ऊपर थी। लेकिन उसने मेरे को बिस्तर पर मेरे को धकेलकर मेरे ऊपर चढ़ गया। जल्दी जल्दी से मेरे को वो चूमने लगा। मेरे पतले से गले पर किस करके मेरे को बहोत ही ज्यादा गर्म कर दिया। अब मेरे को लंड खाने की चाहत और भी ज्यादा बढ़ने लगी। मेरे समीज को निकालकर मम्मो को दबाते हुए मजे लूटने लगा।हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉटकॉम

मेरी दोनों दूध को निचोड़ते हुए उसके भूरे निप्पलों पर अपना मुह लगा दिया। उभरे हुए निप्पलों को वो होंठो से पकड़ कर खींचते हुए किस करने लगा। उसके निप्पलों को खींचते ही मेरी मुह से “……अई…अई….अई……अई….इसस् स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की जोशीली आवाज निकलने लगती थी। मैं बहोत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी। मैं अपनी चूत में उंगली करने लगी। मेरे दूध को उसने खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। मेरे को भी उसके लंड खाने की बारी आ चुकी ही। जिसका मेरे को कई दिनों से इन्तजार था। आख़िरकार मेरा सपना पूरा ही हो गया। आज मेरे को विवेक का मोटा लंड ख़ाने का मौका मिला था। मैंने उसके तौलिये को कसकर खीच कर उसके लंड से अलग किया। उसका लंड अंडरवियर को फाड़कर बाहर आने को परेशान सा लग रहा था।

अंडरवियर में ही उसका लंड उठ बैठ रहा था। मैंने उसके अंडरवियर को खीच कर निकाल दिया। उसके निकालर ही उसका लंड खम्भे की तरह सॉलिड होकर खड़ा हो गया। मै उसके लंड को सहलाने लगी। हाथो के स्पर्श से विवेक का लंड और भी ज्यादा कडा होने लगा। मैंने भी अपना मुह उसके लंड पर लगा दिया। उसके लंड को अपने मुह में अंदर बाहर करके चूसने लगी। वो मेरे सर।को पकड़ कर अपनी लंड चुसवा रहा था। विवेक को आगे का कार्यक्रम कुछ नही पता था। मैने अपने सारे कपडे निकालकर उसके पास बैठ गयी। शायद वो पहली बार किसी नंगी लड़की को देख रहा था। मेरी गुलाबी चूत को देखने के लिए उसने मेरी टांगो को फैला दिया।

मै: इसे चाटो विवेक इससे लड़कियां बहोत ज्यादा उत्तेजित होती हैं

इतना कहते ही वो मेरी चूत को रसमलाई की तरह चाटने लगा। मै “……अई…अई….अई……अई….इसस् स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियों को भरते हुए उसके सर को अपनी चूत में दबाने लगी। मेरी चूत में वो अपना जीभ डालकर चोदते हुए चाट रहा था। अब मेरी चूत उसके लंड को खाने को परेशान थी। मै भी चुदने को बेकरार हो गयी। वो मेरी चूत को चाटकर मेरे को बहोत ही गर्म कर दिया। उसकी जोर की चूत चटाई से लग रहा था। मेरी चूत से माल निकल जायेगा।

मै: विवेक और ज्यादा न तड़पाओ अब अपना लंड डाल दो मेरी चूत में!

मेरे कहते ही विवेक ने अपना लंड मेरी चूत पर अपना लंड रगड़कर छेद को ढूंढने लगा। वो अपना लंड इधर उधर लगा रहा था। मेरे को बहोत मजा आ रहा था। अनाडी चूत के खिलाड़ी को देखकर मेरे को बहोत हंसी आ रही थी। मैंने उसके लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद लार लगा लिया। मेरे चूत के छेद पर लंड लगते ही विवेक ने जोर का धक्का मारा। उसका 7 इंच में से लगभग 4 इंच लंड चूत में प्रवेश कर गया। मै जोर जोर से “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की चीख निकालने लगी। कई दिनों के बाद मैं चुद रही थी। अपनी जिन्दगी में मै ये दूसरा लंड खा रही थी। पहला लंड मेरे पति का था। दूसरा मेरे को आज विवेक खिला रहा था। वो साँड़ की तरह उछल उछल कर मेरी चूत को फाड़ रहा था। मेरे को फटी चूत चुदवाने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था।हिंदीपोर्न स्टोरीज डॉट कॉम मेरी चूत में वो अपना पूरा लंड घुसाकर सम्भोग का भरपूर मजा ले रहा था। मै भी अपनी कमर को उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी। पूरा लंड जड़ तक वो डालकर मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता लगा रहा था मैं बहुत ही खुश थी। मेरे को वो तेजी से चोद कर मेरी मुह से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्ह ह..अ ई…अई…अई…..” की चीखे निकलवा रहा था। पूरा कमरा इसी आवाज से भरा हुआ था। उसने अपना पोजीशन बदला। विवेक थक कर लेट गया। मैं उसके लंड को पकड़कर अपनी चूत से सटाकर बैठ गयी। मै उछल उछल कर चुदने लगी। मै झड़ने वाली हो चुकी थी। इसीलिए मैं और ज्यादा तेजी से उसजे लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर कर रही थीं। मै “आऊ…..आ ऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”, की आवाज के साथ झड़ गयी।

मेरी चूत में सारा माल निकल गया। मै फिर भी चुदती रही। घच घच की आवाज से पूरा कमरा भरा हुआ था। कुछ समय बाद मेरे को चूत में कुछ गरमा गरम महसूस हुआ। विवेक का भी माल मेरी चूत में ही निकल गया। हम दोनों ने चुदाई बंद कर दी। विवेक ने अपना लंड निकाला और किनारे खिसक गया। मैंने चूत पर कपड़ा लगाकर चूत को साफ़ किया। उसके बाद मैंने उसका लंड भी साफ़ किया। बाद में खाना बनाकर हम दोनों ने खाना खाया। फिर एक बार चुदाई का आनंद लेकर वो अपने घर चला गया। उसके बाद मौक़ा मिलते ही मैं चुदा लेती हूँ।

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