विधवा की चुदाई की ख्वाहिश को पूरा कर दिया

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विधवा की चुदाई की ख्वाहिश को पूरा कर दिया,, हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शुभम सोनी है। मैं हिमाचल प्रदेश में रहता हूँ। मेरी उम्र 28 साल है। मेरे को लोग बहुत ही ज्यादा लाइक करते थे। मै अपने मोहल्ले का सबसे स्मार्ट आदमी हूँ। मै शादी शुदा मर्द हूँ। मेरे को देखकर बहुत सारी लड़कियां आहे भरती रहती थी। मै रोज जिम जाकर अपना शरीर हष्ट पुष्ट बना रखा था। मैंने सिक्स पैक और छातियों को अलग अलग करके अपने शरीर की एक एक मसल को अलग अलग कर लिया था। एक हिसाब से मैं पहलवान टाइप का दीखता था। मेरे इस बॉडी की तरह मेरा लंड भी काफी मोटा तगड़ा था। मेरा लंड 6 इंच का । मै अपने शरीर का काफी ख्याल रखता हूँ। मेरी बीबी की तो हालत खराब हो जाती इस कदर उसकी चुदाई कर देता हूँ। मेरा सेक्स टाइमिंग भी बहुत अच्छा है। घंटो तक चुदाई करने के बाद ही कही मै स्खलित होने की स्थिति में पहुचता हूँ। अच्छे फिगर वाली लड़कियों को ही अपना लंड खिलाता हूँ।

जो की मेरे लंड को सह सके। ढीली ढाली बॉडी वाली लडकियां मेरे लंड को सह ही नहीं सकती। एक दिन मैं मोहल्ले से गुजर कर अपने घर की तरफ आ रहा था। मेरे को सालों गुजरे हुए दोस्त की बीबी दिखीं। देखने में वो एक दम मस्त माल दिख रही थी। न कोई शौक न कोई श्रृंगार किया था। फिर भी बहुत हॉट लग रही थी। उसका बदन 36 32 34 रहा होगा। मेरे को लड़कियों की साइज को देखने में बहुत मजा आता है। उसने एक साडी पहनी हुई थी। उसमें वो बिल्कुल पत्थर की मूरत सी लग रही थी। मै तो उसे देखते ही उस पर फ़िदा हो गया। मेरा लंड तो खम्भे की तरह खड़ा हो गया। उसे चोदने के सपने मेरे दिमाग में आने लगे। उसका नाम अर्चिता था। नाम की तरह वो बेहद खूबसूरत थी।

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उसकी खूबसूरती का मै दीवाना हो गया। मेरे को देखकर वो भी कभी कभी हंस देती थी। एक दिन मेरे को छत पर कपडे फैलाते हुए दिखी। मेरे को पहले नही पता था कि वो इतनी खूबसूरत होगी। जब से मैने उसके 36″ के दूध को देखा था। तब से लेकर अब तक मैं हर नजर उसके घर पर ही गड़ाए रहता था। उस दिन छत पर वो अपनी ब्रा को टांग रही थी। तभी उसकी नजर मेरी ओर पड़ गयी। उसने जल्दी से उसे साडी से दबा दिया। शरमाते हुए वो छत से नीचे चली गयी। मै चुपचाप सारा तमाशा देखता रहा। मेरा तो लंड खड़ा हो गया। मैंने छत पर ही मुठ मार कर किसी तरह से अपने लंड को शांत किया। उस दिन से उसकी सफ़ेद ब्रा ही मेरे दिल औऱ दिमाग में छा गयी। मै उसके घर के पास अक्सर आने जाने लगा।

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एक दिन मै वही खड़ा था तभी उसने बाहर निकल कर जनरल स्टोर से कुछ सामान लिया। अर्चिता के घर के पास ही जनरल स्टोर था। मेरे को देखकर वो फिर से शर्माती हुयी चली गयी। उसने अंदर जाकर खिड़की खोल कर मेरे से नैन मटक्का करना शुरू किया।कुछ देर तक ऐसा करने के बाद मैंने अपना नम्बर एक कागज पर लिखा और उसके खिड़की के भीतर फेंक दिया। ये काम मैंने बड़ी ही हिम्मत करके किया था। मेरे को जल्दी मालूम करना था कि ये चुदेगी भी मेरे से या नहीं! इतना करके मै अपने घर आ गया। बस उसके फ़ोन का इंतजार था मेरे को! रात हो गयी थी। करीब 11 बज3 उसने घर काम काज ख़त्म करके मेरे को फोन किया।

मै: हेल्लो! कौन
अर्चिता: हॉ मैं अर्चिता बोल रही हूँ

इतना कहकर हम दोनों ने अपना अपना इट्रोडक्शन दिया । एक दुसरे की हर ख्वाहिश को हम समझ रहे थे। अर्चिता की सॉलिड चूंचियां आज तक मेरे को वैसे ही नजर आ रही थी। मैं अर्चिता की चूत को चोदने की कल्पना करता रहता था। अर्चिता की चूत काली होगी या उसी की तरह गोरी होगी! ऐसी ऐसी बाते मेरे दिमाग में चलती रहती थी। उस दिन तो कम समय तक बात किया। उसके बाद बात करने की टाइम को मैं बढ़ाता गया। धीरे धीरे रोमांटिक बातो के साथ फोन सेक्स शुरू होने लगा।
मै: क्या अर्चिता तुम भी फ़ोन पर ऐसी बाते करके मेरा लंड खड़ा करवा देती हो!
अर्चिता: मेरी चूत में भी तुम आग लगा देते हो मेरे को चोदने के बारे में कहकर!
मै: मेरी जान तुम कहो तो तुम्हारी तङप को मैं खत्म कर दू
अर्चिता: अभी दो दिन रुको उसके बाद जी भर के कर लेना
मै: पक्का है दो दिन के बाद तुम्हारी चूत को देखने का मॉक्स मिल जायेगा
अर्चिता: तुमसे ज्यादा तो मेरे को लंड को प्यार करने की ख्वाहिश है। वर्षो हो गए मेरे को लंड के दर्शन को!

मै दो दिन के बीतने का ही इन्तजार कर रहा था। दो दिन बड़ी मुश्किल से ही ख़त्म हुआ। उसके सास ससुर तीर्थ यात्रा पर चले गए। घर में एक छोटा सा लड़का था। जो की अभी तीन साल का रहा होगा। उसके सास दोपहर तक तीर्थयात्रा पर निकल गए।

शाम को अर्चिता ने मेरे को रात में आने के लिए फ़ोन किया। मैने अपने बीबी को भी मायके भेज दिया था। घर पर मैं अपने बीबी बच्चो के साथ ही रहता था। लेकिन उस दिन रोकने टोकने वाला कोई नहीं था। रात को करीब 11 बजे मै उसके घर के दरवाजे पर पहुच गया। वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी। रात में मेरे मोहल्ले के सारे लोग जल्द ही सो जाते हैं। मैं भी उसी रात के अंधेरे का फायदा उठाया और अपनी मंजिल यानी की अर्चिता की चूत तक पहुच गया। उसका बच्चा भी सो चुका था। मै ख़ुशी से पागल होता जा रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर उठा लिया। वो भी बहुत खुश लग रही थी। मेरे को उसने अपने कमरे में लेकर गयी। एक अच्छा बड़ा सा बेड पड़ा था। मै उस पर धूम मचाने वाला था। उसे बिस्तर पर झट से पटक कर उसके ऊपर चढ़ लिया। अर्चिता ने उस दिन सलवार और समीज पहना हुआ था।

अर्चिता ने मेरे को कुछ करने से नहीं रोका। उसके गुलाबी होंठ को देखते ही मैं उसे चूसने के लिए अपना होठ लगा दिया। मुलायम गुलाब की पंखुडियो के जैसे होंठ को चूमने का अवसर प्राप्त हो गया। पहली बार मैंने इस तरह के होंठ का चुम्बन करके चुसाई कर रहा था। उसके होंठो में बहुत सारा रस भरा हुआ था। मेरे को उसकी चूत तक धीरे धीरे पहुचना था। मै उसके दूध को हाथो में लेकर दबाने लगा। वो सिसकारियां भरने लगी। जोर से बूब्स को मसलते ही वो सिमट कर “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की सिसकारियां भर रही थीं। मैंने उसके दूध को दबाया तो वो कहने लगी।

अर्चिता: और दबाओ मेरे को मजा आ रहा है। बहुत दिनो से इसमें रस भरा हुआ है

मै भी जोर जोर से दबाकर मजा ले रहा था। वो मेरा साथ देने लगी। उस दिन उसने काले रंग की सलवार और समीज पहन रखी थी। मै उसके सामने खड़ा होकर अपना अंग प्रदर्शन करा दिया। मेरे को उसके नरम चिकने संगमरमर के जैसे दूध को दबाने में बहुत मजा आ रहा था। वो मेरे से चिपकती ही जा रही थी। तभी मैंने उसे खीच कर अलग किया। उसकी समीज को ऊपर उठा कर निकाल दिया। वो मेरे सामने ब्रा में हो गयी। मैं उसे बिस्तर पर लिटाकर उसके ऊपर चढ़ गया। वो मेरे को चिपक कर किस करने लगी। अभी तक हम दोनों चुदाई को तरस रहे थे। मैने उसके होंठो को चूस चूस कर लाल लाल कर दिया। उसके होंठ को काटते ही वो सिसकने लगती। मै उसकी ब्रा में हाथ घुसाये उसकी दूध को दबा कर मालिश कर रहा था। मैंने ब्रा की हुक को खोलकर उसके चुच्चो को आजाद किया। गोरे रंग के दूध पर चमकते ब्राउन कलर का निप्पल बहोत ही लाजबाब लग रहा था। मैंने अपना मुह चमकदार निप्पल पर लगाकर पीने लगा। पीने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था।

उसके दूध में अपना दांत गड़ा रहा था। वो जोर जोर से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज निकालने लगी। मेरे को वो अपने दूध में दबा दबा कर पिला रही थी। मैंने अपने लंड को उसके हाथों में पकड़ा कर चूसने को कहा। वो मेरे लंड से खेलते हुए चूसने लगी। लंड की पूरी नसे उसकी दिखने लगी। मैंने उसकी सलवार का नाडा उसकी पैंटी सहित निकाल कर टांग को फैला दिया। उसकी टांग के बीच में छिपी चूत का दर्शन करके चाटने लगा। कुछ देर बाद मैने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसाकर चाटने लगा। जीभ ने उसे खूब गर्म कर दिया। मैंने अपना लंड मुठियाते हुए उसकी चूत में रगड़ने लगा। वो बिस्तर को को खींच खीच कर दबा रही थी। मैंने अपना लंड रगड़ कर उसे खूब गर्म कर दिया।

अर्चिता: मुझसे रहा नही जाता अब तुम डाल दो अपना लंड मेरी चूत में!
मै: थोड़ा शब्र करो डाल रहा हूँ!

मैंने उसकी चूत पर थूक कर उसे गीला किया। मेरा लंड घुसने को बेकरार होने लगा। अपने लंड पर भी थोड़ा सा थूक लगाकर मालिश किया। अब मेरा लंड काजल की चूत में घुसने को तैयार हो गया। मैंने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड लगाकर जोर का धक्का मारा। मेरे लंड का सुपारा अंदर चूत में घुस गया। वो जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की आवाज निकाल कर चीखने लगी। अर्चिता की दर्द भरी आवाज को दबाने के लिए मैंने अपना हाथ उसके मुह पर रख कर दबा दिया।

उसकी आवाज तो दब गयी लेकिन अर्चिता डर गयी। वी मेरे से अपनी चूत दूर करने लगी। मैंने अपना लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकावट के पूरा घुसा दिया। मैंने चैन से सांस लेकर चुदाई की प्रक्रिया शुरू कर दी। मेरा लंड उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बाहर होने लगा। वो पीठ में अपने लम्बे लम्बे नाखूनों को गड़ा रही थी। मैंने उसकी टाइट चूत को चोद कर आज उसका भरता बनाने की सोच रहा था। अर्चिता के दर्द को थोड़ा कम होने के बाद मैंने जोर जोर से अपना लंड अंदर बाहर करके चुदाई करनी शुरू कर दी। मेरा लंड उसकी चूत में बहोत तेजी से अंदर घुस रहा था। अब वो और जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज निकालने लगी। वो खुद ही अपनी गांड को उठा उठा कर चुदवाने लगी। अर्चिता को अब दर्द में भी मजा आ रहा था।

मैंने उससे पूछा: अर्चिता कैसा लगा!
अर्चिता: तुम और जोर से चोदो फाड़ दो अच्छे से मेरी चूत मेरे को बहोत मजा आ रहा है।

मैंने उसकी बाते सुनकर और भी जोरदार शॉट लगाना शुरू कर दिया। वो भी कमर हिला हिला कर चुदवाने में मस्त लग रही थी। मैं पास में रखे कुर्सी पर बैठ गया। वो मेरे गोद में आकर बैठ गयी। अर्चिता अपनी चूत से मेरा लंड सटाकर वो जोर जोर से उछल कर चुदने लगी। मेरा लंड भी खम्भे की तरह डटकर खड़ा रहा। वो तेजी से ऊपर नीचे अपने मदमस्त “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की अर्चिता आवाजो के धुन में चुदवा रही थी। मै उसकी दोनों को पकड़ कर दबा रहा था। उसकी गांड पर हाथ मार मार कर उसे उत्तेजित कर रहा था। उसके दोनों दूध हवा में झूल रहे थे। वो नजारा आज भी मैं देखता हूँ। मेरे लंड की रगड़ उसकी चूत ज्यादा देर तक सह न सकी।

वो स्खलित हो गयी। मेरा लंड अब भी खड़ा था। मैंने भी अपना लंड उठा उठा कर पेलना शुरू किया। मै भी झड़ने की हालत में पहुचने वाला था। अर्चिता को चोदने की स्पीड बहुत बढ़ गयी। एक बार फिर से वो जोर जोर से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज के साथ चुद कर मेरे मजा दे रही थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुह में रख कर मुठ मारने लगा। मेरा सारा माल उसकी मुह में भर गया। अर्चिता बड़ा मजा ले ले कर मेरा माल पीने लगी। पूरी रात हमने मौसम बनते ही चुदाई की। आज भी मै उसे चोद कर मजा लेता हूँ। वो भी बहोत खुश रहती है। मौक़ा पाते ही वो मेरे से चुद लेती है।

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